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Majjhima Nikāya 1 मज्झिम निकाय १
Mūlapariyāyasutta मूलपरियायसूत्र
Evaṁ me sutaṁ—ऐसा मैंने सुना—
ekaṁ samayaṁ bhagavā ukkaṭṭhāyaṁ viharati subhagavane sālarājamūle. एक समय भगवंत उक्कठ के पास, सुभग वन में सालराज के जड़ पर विहार कर रहे थे।
Tatra kho bhagavā bhikkhū āmantesi: वहां भगवंत ने भिक्षुओं से कहा:
“bhikkhavo”ti. “भिक्षुओं!।
“Bhadante”ti te bhikkhū bhagavato paccassosuṁ. “भदंत”, भिक्षुओं ने जवाब दिया।
Bhagavā etadavoca: भगवंत ने एैसा कहा:
“sabbadhammamūlapariyāyaṁ vo, bhikkhave, desessāmi. “भिक्षुओं, मैं सभी र्धर्मों के मूल का उपदेश सिखाता हूँ।
Taṁ suṇātha, sādhukaṁ manasi karotha, bhāsissāmī”ti. उसे सुनो, और अच्छी तरह से मन में धारण करो, कहता हूँ”।
“Evaṁ, bhante”ti kho te bhikkhū bhagavato paccassosuṁ. “हां भंते”, भिक्षुओं ने जवाब दिया।
Bhagavā etadavoca: भगवंत ने ऐसा कहा:
“Idha, bhikkhave, assutavā puthujjano ariyānaṁ adassāvī ariyadhammassa akovido ariyadhamme avinīto, sappurisānaṁ adassāvī sappurisadhammassa akovido sappurisadhamme avinīto—“अब, भिक्षुओं, एक अज्ञानी सामान्य मनुष्य जो आर्यों के दर्शन से वंचित है, जिस ने आर्यों के धर्म को सुना नहीं, जो आर्यधर्म से अंजान है, जो सज्जनों के दर्शन से वंचित है, जिस ने सज्जनों के धर्म को सुना नहीं, जो सज्जनों के धर्म से अंजान है—
pathaviṁ pathavito sañjānāti; वह पृथ्वी को पृथ्वी समझता है;
pathaviṁ pathavito saññatvā pathaviṁ maññati, pathaviyā maññati, pathavito maññati, pathaviṁ meti maññati, pathaviṁ abhinandati. पृथ्वी को पृथ्वी समझकर स्वयं को पृथ्वी मानता है, स्वयं को पृथ्वी में मानता है, स्वयं को पृथ्वी से अलग मानता है, पृथ्वी मेरी है ऐसा मानता है, पृथ्वी में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हुं।
Āpaṁ āpato sañjānāti; वह पानी को पानी समझता है;
āpaṁ āpato saññatvā āpaṁ maññati, āpasmiṁ maññati, āpato maññati, āpaṁ meti maññati, āpaṁ abhinandati. पानी को पानी समझकर स्वयं को पानी मानता है, स्वयं को पानी में मानता है, स्वयं को पानी से अलग मानता है, पानी मेरा है ऐसा मानता है, पानी में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Tejaṁ tejato sañjānāti; वह अग्नि को अग्नि समझता है;
tejaṁ tejato saññatvā tejaṁ maññati, tejasmiṁ maññati, tejato maññati, tejaṁ meti maññati, tejaṁ abhinandati. अग्निको अग्नि समझकर स्वयं को अग्नि मानता है, स्वयं को अग्नि में मानता है, स्वयं को अग्नि से अलग मानता है, अग्नि मेरी है ऐसा मानता है, अग्नि में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Vāyaṁ vāyato sañjānāti; वह वायु को वायु समझता है;
vāyaṁ vāyato saññatvā vāyaṁ maññati, vāyasmiṁ maññati, vāyato maññati, vāyaṁ meti maññati, vāyaṁ abhinandati. वायु को वायु समझकर स्वयं को वायु मानता है, स्वयं को वायु में मानता है, स्वयं को वायु से अलग मानता है, वायु मेरा है ऐसा मानता है, वायु में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Bhūte bhūtato sañjānāti; वह प्राणियों को प्राणी समझता है;
bhūte bhūtato saññatvā bhūte maññati, bhūtesu maññati, bhūtato maññati, bhūte meti maññati, bhūte abhinandati. प्राणियों को प्राणी समझकर स्वयं को प्राणी मानता है, स्वयं को प्राणियों में मानता है, स्वयं को प्राणियों से अलग मानता है, प्राणी मेरे हैं ऐसा मानता है, प्राणियों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Deve devato sañjānāti; वह देवों को देव समझता है;
deve devato saññatvā deve maññati, devesu maññati, devato maññati, deve meti maññati, deve abhinandati. देवों को देव समझकर स्वयं को देव मानता है, स्वयं को देवों में मानता है, स्वयं को देवों से अलग मानता है, देव मेरे हैं ऐसा मानता है, देवों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Pajāpatiṁ pajāpatito sañjānāti; वह प्रजापति को प्रजापति समझता है;
pajāpatiṁ pajāpatito saññatvā pajāpatiṁ maññati, pajāpatismiṁ maññati, pajāpatito maññati, pajāpatiṁ meti maññati, pajāpatiṁ abhinandati. प्रजापति को प्रजापति समझकर स्वयं को प्रजापति मानता है, स्वयं को प्रजापति में मानता है, स्वयं को प्रजापतिसे अलग मानता है, प्रजापति मेरे हैं ऐसा मानता है, प्रजापति में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Brahmaṁ brahmato sañjānāti; वह ब्रह्मा को ब्रह्मा समझता है;
brahmaṁ brahmato saññatvā brahmaṁ maññati, brahmasmiṁ maññati, brahmato maññati, brahmaṁ meti maññati, brahmaṁ abhinandati. ब्रह्मा को ब्रह्मा समझकर स्वयं को ब्रह्मा मानता है, स्वयं को ब्रह्मा में मानता है, स्वयं को ब्रह्मा से अलग मानता है, ब्रह्मा मेरे हैं ऐसा मानता है, ब्रह्मा में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Ābhassare ābhassarato sañjānāti; वह आभास्वर देवों को आभास्वर देव समझता है;
ābhassare ābhassarato saññatvā ābhassare maññati, ābhassaresu maññati, ābhassarato maññati, ābhassare meti maññati, ābhassare abhinandati. आभास्वर देवों को आभास्वर देव समझकर स्वयं को आभास्वर देव मानता है, स्वयं को आभास्वर देवों में मानता है, स्वयं को आभास्वर देवों से अलग मानता है, आभास्वर देव मेरे हैं ऐसा मानता है, आभास्वर देवों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Subhakiṇhe subhakiṇhato sañjānāti; शुभकृत देवों को शुभकृत देव समझता है;
subhakiṇhe subhakiṇhato saññatvā subhakiṇhe maññati, subhakiṇhesu maññati, subhakiṇhato maññati, subhakiṇhe meti maññati, subhakiṇhe abhinandati. शुभकृत देवों को शुभकृत देव समझकर स्वयं को शुभकृत देव मानता है, स्वयं को शुभकृत देवों में मानता है, स्वयं को शुभकृत देवों से अलग मानता है, शुभकृत देव मेरे हैं ऐसा मानता है, शुभकृत देवों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Vehapphale vehapphalato sañjānāti; महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव समझता है;
vehapphale vehapphalato saññatvā vehapphale maññati, vehapphalesu maññati, vehapphalato maññati, vehapphale meti maññati, vehapphale abhinandati. महाफलधारी देवों को महाफलधारी देव समझकर स्वयं को महाफलधारी देव मानता है, स्वयं को महाफलधारी देवों में मानता है, स्वयं को महाफलधारी देवों से अलग मानता है, महाफलधारी देव मेरे हैं ऐसा मानता है, महाफलधारी देवों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Abhibhuṁ abhibhuto sañjānāti; अभिभू देवों को अभिभू देव समझता है;
abhibhuṁ abhibhuto saññatvā abhibhuṁ maññati, abhibhusmiṁ maññati, abhibhuto maññati, abhibhuṁ meti maññati, abhibhuṁ abhinandati. अभिभू देवों को अभिभू देव समझकर स्वयं को अभिभू देव मानता है, स्वयं को अभिभू देवों में मानता है, स्वयं को अभिभू देवों से अलग मानता है, अभिभू देव मेरे हैं ऐसा मानता है, अभिभू देवों में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Ākāsānañcāyatanaṁ ākāsānañcāyatanato sañjānāti; अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान समझता है;
ākāsānañcāyatanaṁ ākāsānañcāyatanato saññatvā ākāsānañcāyatanaṁ maññati, ākāsānañcāyatanasmiṁ maññati, ākāsānañcāyatanato maññati, ākāsānañcāyatanaṁ meti maññati, ākāsānañcāyatanaṁ abhinandati. अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान समझकर स्वयं को अनंत आकाश का मनोस्थान मानता है, स्वयं को अनंत आकाश के मनोस्थान में मानता है, स्वयं को अनंत आकाश के मनोस्थान से अलग मानता है, अनंत आकाश का मनोस्थान मेरा है ऐसा मानता है, अनंत आकाश के मनोस्थान में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Viññāṇañcāyatanaṁ viññāṇañcāyatanato sañjānāti; अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान समझता है;
viññāṇañcāyatanaṁ viññāṇañcāyatanato saññatvā viññāṇañcāyatanaṁ maññati, viññāṇañcāyatanasmiṁ maññati, viññāṇañcāyatanato maññati, viññāṇañcāyatanaṁ meti maññati, viññāṇañcāyatanaṁ abhinandati. अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान समझकर स्वयं को अनंत चेतना का मनोस्थान मानता है, स्वयं को अनंत चेतना के मनोस्थान में मानता है, स्वयं को अनंत चेतना के मनोस्थान से अलग मानता है, अनंत चेतना का मनोस्थान मेरा है ऐसा मानता है, अनंत चेतना के मनोस्थान में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Ākiñcaññāyatanaṁ ākiñcaññāyatanato sañjānāti; सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान समझता है;
ākiñcaññāyatanaṁ ākiñcaññāyatanato saññatvā ākiñcaññāyatanaṁ maññati, ākiñcaññāyatanasmiṁ maññati, ākiñcaññāyatanato maññati, ākiñcaññāyatanaṁ meti maññati, ākiñcaññāyatanaṁ abhinandati. सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान समझकर स्वयं को सर्व अभाव का मनोस्थान मानता है, स्वयं को सर्व अभाव के मनोस्थान में मानता है, स्वयं को सर्व अभाव के मनोस्थान से अलग मानता है, सर्व अभाव का मनोस्थान मेरा है ऐसा मानता है, सर्व अभाव के मनोस्थान में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Nevasaññānāsaññāyatanaṁ nevasaññānāsaññāyatanato sañjānāti; संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान समझता है;
nevasaññānāsaññāyatanaṁ nevasaññānāsaññāyatanato saññatvā nevasaññānāsaññāyatanaṁ maññati, nevasaññānāsaññāyatanasmiṁ maññati, nevasaññānāsaññāyatanato maññati, nevasaññānāsaññāyatanaṁ meti maññati, nevasaññānāsaññāyatanaṁ abhinandati. संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञान और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान समझकर स्वयं को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान मानता है, स्वयं को संज्ञा और असंज्ञा के अभावके मनोस्थान में मानता है, स्वयं को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान से अलग मानता है, संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान मेरा है ऐसा मानता है, संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Diṭṭhaṁ diṭṭhato sañjānāti; देखे हुए को देखा हुआ समझता है;
diṭṭhaṁ diṭṭhato saññatvā diṭṭhaṁ maññati, diṭṭhasmiṁ maññati, diṭṭhato maññati, diṭṭhaṁ meti maññati, diṭṭhaṁ abhinandati. देखे हुए को देखा हुआ समझकर स्वयं को देखा हुआ मानता है, स्वयं को देखे हुए में मानता है, स्वयं को देखे हुए से अलग मानता है, देखा हुआ मेरा है ऐसा मानता है, देखे हुए में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Sutaṁ sutato sañjānāti; सुने हुए को सुना हुआ समझता है;
sutaṁ sutato saññatvā sutaṁ maññati, sutasmiṁ maññati, sutato maññati, sutaṁ meti maññati, sutaṁ abhinandati. सुने हुए को सुना हुआ समझकर स्वयं को सुना हुआ मानता है, स्वयं को सुने हुए में मानता है, स्वयं को सुने हुए से अलग मानता है, सुना हुआ मेरा है ऐसा मानता है, सुने हुए में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Mutaṁ mutato sañjānāti; संवेदित को संवेदित समझता है;
mutaṁ mutato saññatvā mutaṁ maññati, mutasmiṁ maññati, mutato maññati, mutaṁ meti maññati, mutaṁ abhinandati. संवेदित को संवेदित समझकर स्वयं को संवेदित मानता है, स्वयं को संवेदित में मानता है, स्वयं को संवेदित से अलग मानता है, संवेदित मैं हुं ऐसा मानता है, संवेदित में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Viññātaṁ viññātato sañjānāti; जाने हुए को जाना हुआ समझता है;
viññātaṁ viññātato saññatvā viññātaṁ maññati, viññātasmiṁ maññati, viññātato maññati, viññātaṁ meti maññati, viññātaṁ abhinandati. जाने हुए को जाना हुआ समझकर स्वयं को जाना हुआ मानता है, स्वयं को जाने हुए में मानता है, स्वयं को जाने हुए से अलग मानता है, जाना हुआ मेरा है ऐसा मानता है, जाने हुए में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Ekattaṁ ekattato sañjānāti; एकता को एकता समझता है;
ekattaṁ ekattato saññatvā ekattaṁ maññati, ekattasmiṁ maññati, ekattato maññati, ekattaṁ meti maññati, ekattaṁ abhinandati. एकता को एकता समझकर स्वयं को एकता मानता है, स्वयं को एकता में मानता है, स्वयं को एकता से अलग मानता है, एकता मेरी है ऐसा मानता है, एकता में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Nānattaṁ nānattato sañjānāti; विविधता को विविधता समझता है;
nānattaṁ nānattato saññatvā nānattaṁ maññati, nānattasmiṁ maññati, nānattato maññati, nānattaṁ meti maññati, nānattaṁ abhinandati. विविधता को विविधता समझकर स्वयं को विविधता मानता है, स्वयं को विविधता में मानता है, स्वयं को विविधता से अलग मानता है, विविधता मेरी है ऐसा मानता है, विविधता में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Sabbaṁ sabbato sañjānāti; सर्व को सर्व समझता है;
sabbaṁ sabbato saññatvā sabbaṁ maññati, sabbasmiṁ maññati, sabbato maññati, sabbaṁ meti maññati, sabbaṁ abhinandati. सर्व को सर्व समझकर स्वयं को सर्व मानता है, स्वयं को सर्व में मानता है, स्वयं को सर्व से अलग मानता है, सर्व मेरा है ऐसा मानता है, सर्व में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Nibbānaṁ nibbānato sañjānāti; निर्वाण को निर्वाण समझता है;
nibbānaṁ nibbānato saññatvā nibbānaṁ maññati, nibbānasmiṁ maññati, nibbānato maññati, nibbānaṁ meti maññati, nibbānaṁ abhinandati. निर्वाण को निर्वाण समझकर स्वयं को निर्वाण मानता है, स्वयं को निर्वाण में मानता है, स्वयं को निर्वाण से अलग मानता है, निर्वाण मेरा है ऐसा मानता है, निर्वाण में आनंद लेता है।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Apariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उसे ठीक से समझा नहीं’, कहता हूँ।
Puthujjanavasena paṭhamanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. सामान्य जन के प्रथम भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Yopi so, bhikkhave, bhikkhu sekkho appattamānaso anuttaraṁ yogakkhemaṁ patthayamāno viharati, sopi pathaviṁ pathavito abhijānāti; भिक्षुओं, जो भिक्षु शिष्य है, जिसने ध्येय पूर्ण नही किया किंतु जिसे बंधन से मुक्ति के सर्वश्रेष्ठ आश्रयकी आकांशा है वह भी प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानता है;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ mā maññi, pathaviyā mā maññi, pathavito mā maññi, pathaviṁ meti mā maññi, pathaviṁ mābhinandi. परंतु प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानकर उन्हें स्वयं को पृथ्वी नहीं मानना चाहिए, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानना चाहिए, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानना चाहिए, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानना चाहिए, पृथ्वी में आनंद नहीं लेना चाहिए।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññeyyaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उन्हे संपूर्णपूर्वक समझमें आए इस लिए ’, कहता हुं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानता है।
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ mā maññi, nibbānasmiṁ mā maññi, nibbānato mā maññi, nibbānaṁ meti mā maññi, nibbānaṁ mābhinandi. परंतु निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानना चाहिए, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानना चाहिए, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानना चाहिए, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानना चाहिए, निर्वाण में आनंद नहीं लेना चाहिए।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññeyyaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उन्हें संपूर्ण पूर्वक समझ में आए इस लिए ’, कहता हुं।
Sekkhavasena dutiyanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. शिष्य की द्वितीय भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Yopi so, bhikkhave, bhikkhu arahaṁ khīṇāsavo vusitavā katakaraṇīyo ohitabhāro anuppattasadattho parikkhīṇabhavasaṁyojano sammadaññāvimutto, sopi pathaviṁ pathavito abhijānāti; भिक्षुओं, जो भिक्षु अशुद्धियों के अंत द्वारा अरहंत हुए हैं, जिन्हों ने धार्मिक जीवन जिया है, जो करना था वह किया है, बोझ रख दिया है, स्वयं का ध्येय सिद्ध किया है, अस्तित्व के बंधन का संपूर्णपूर्वक विनाश किया है, जो सम्मज्ञान द्वारा संपूर्णपूर्वक मुक्त हुए हैं, वह भी प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी जानकर स्वयं को पृथ्वी नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानते, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानते, पृथ्वी में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उन्हें संपूर्ण पूर्वक समझ में आया है इस लिए’, कहता हुं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणीयों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभावके मनोस्थान को सर्वअभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूपसे निर्वाण के तौरसे जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññātaṁ tassā’ti vadāmi. ‘उन्हें संपूर्ण पूर्वक समझ में आया है इस लिए ’, कहता हुं।
Khīṇāsavavasena tatiyanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. आसव विनाशित के तिसरी भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Yopi so, bhikkhave, bhikkhu arahaṁ khīṇāsavo vusitavā katakaraṇīyo ohitabhāro anuppattasadattho parikkhīṇabhavasaṁyojano sammadaññā vimutto, sopi pathaviṁ pathavito abhijānāti; भिक्षुओं, जो भिक्षु अशुद्धियों के अंत द्वारा अरहंत हुए है, जिन्हों ने धार्मिक जीवन जिया है, जो करना था वो किया है, बोज़ रख दिया है, खुदका ध्येय सिद्ध किया है, अस्तित्व के बंधन का संपूर्णपूर्वक विनाश किया है, जो सम्मज्ञान द्वारा संपूर्णपूर्वक मुक्त हुए है, वह भी प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वीको प्रत्यक्ष रूपसे पृथ्वीके तौरसे जानकर स्वयं कोको पृथ्वी नहि मानते, खु़दको पृथ्वीमे नहि मानते, खु़दको पृथ्वीसे अलग नहि मानते, पृथ्वी मेरी है ऍसा नहीं मानते, पृथ्वीमे आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā rāgassa, vītarāgattā. क्योंकि वह लालसा के विनाश से लालसा से मुक्त हैं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूपसे निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā rāgassa, vītarāgattā. क्योंकि वह लालसा के विनाश से लालसा से मुक्त हैं।
Khīṇāsavavasena catutthanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. आसवविनाशित के चौथे भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Yopi so, bhikkhave, bhikkhu arahaṁ khīṇāsavo vusitavā katakaraṇīyo ohitabhāro anuppattasadattho parikkhīṇabhavasaṁyojano sammadaññāvimutto, sopi pathaviṁ pathavito abhijānāti; भिक्षुओं, जो भिक्षु अशुद्धियों के अंत द्वारा अरहंत हुए हैं, जिन्हों ने धार्मिक जीवन जिया है, जो करना था वो किया है, बोझ रख दिया है, स्वयं का ध्येय सिद्ध किया है, अस्तित्व के बंधन का संपूर्णपूर्वक विनाश किया है, जो सम्मज्ञान द्वारा संपूर्णपूर्वक मुक्त हुए हैं, वह भी प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के तौर से जानकर स्वयं को पृथ्वी नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानते, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानते, पृथ्वी में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā dosassa, vītadosattā. क्योंकि वह द्वेष के विनाश से द्वेष से मुक्त हैं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā dosassa, vītadosattā. क्योंकि वह द्वेष के विनाश से द्वेष से मुक्त हैं।
Khīṇāsavavasena pañcamanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. आसव विनाश के पांचवी भूमिपरिच्छेद की पूर्णता।
Yopi so, bhikkhave, bhikkhu arahaṁ khīṇāsavo vusitavā katakaraṇīyo ohitabhāro anuppattasadattho parikkhīṇabhavasaṁyojano sammadaññāvimutto, sopi pathaviṁ pathavito abhijānāti; भिक्षुओं, जो भिक्षु अशुद्धियों के अंत द्वारा अरहंत हुए हैं, जिन्हों ने धार्मिक जीवन जिया है, जो करना था वह किया है, बोझ रख दिया है, स्वयं का ध्येय सिद्ध किया है, अस्तित्व के बंधन का संपूर्णपूर्वक विनाश किया है, जो सम्मज्ञान द्वारा संपूर्णपूर्वक मुक्त हुए हैं, वह भी प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी जानकर स्वयं को पृथ्वी नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानते, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानते, पृथ्वी में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā mohassa, vītamohattā. क्योंकि वह मोह के विनाश से मोह से मुक्त हैं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभावके मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
Khayā mohassa, vītamohattā. क्योंकि वह मोह के विनाश से मोह से मुक्त हैं।
Khīṇāsavavasena chaṭṭhanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. आसवविनाशितके छठे भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Tathāgatopi, bhikkhave, arahaṁ sammāsambuddho pathaviṁ pathavito abhijānāti; अरहंत, सम्मसंबुध्ध, तथागत भी पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के तौर से जानकर स्वयं को पृथ्वी नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानते, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानते, पृथ्वी में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññātantaṁ tathāgatassā’ti vadāmi. ‘तथागत को संपूर्ण रूप से अंत तक समझ में आया है इस लिए ’, कहता हुं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Pariññātantaṁ tathāgatassā’ti vadāmi. ‘तथागत को संपूर्ण रूप से अंत तक समझ में आया है इस लिए ’, कहता हुं।
Tathāgatavasena sattamanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. तथागत की सातवी भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Tathāgatopi, bhikkhave, arahaṁ sammāsambuddho pathaviṁ pathavito abhijānāti; अरहंत, सम्मसंबुध्ध, तथागत भी पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के तौर से जानते हैं;
pathaviṁ pathavito abhiññāya pathaviṁ na maññati, pathaviyā na maññati, pathavito na maññati, pathaviṁ meti na maññati, pathaviṁ nābhinandati. पृथ्वी को प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के तौर से जानकर स्वयं को पृथ्वी नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी में नहीं मानते, स्वयं को पृथ्वी से अलग नहीं मानते, पृथ्वी मेरी है ऐसा नहीं मानते, पृथ्वी में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Nandī dukkhassa mūlan’ti—‘आनंद लेने की वृत्ति दु:ख का मूल है’—
iti viditvā ‘bhavā jāti bhūtassa jarāmaraṇan’ti. और ‘अस्तित्व के कारण से जन्म होता है और जो जनम लेता है उसे वृद्धता और मृत्यु का अनुभव होता है’।
Tasmātiha, bhikkhave, ‘tathāgato sabbaso taṇhānaṁ khayā virāgā nirodhā cāgā paṭinissaggā anuttaraṁ sammāsambodhiṁ abhisambuddho’ti vadāmi. इस लिए भिक्षुओं, ‘तृष्णा के संपूर्ण विनाश वैराग्य निरोध त्याग और छुटकारे से तथागत सर्वश्रेष्ठ सम्मसंबुद्धि में जागृत हुए हैं’, कहता हुं।
Āpaṁ …pe… पानी को पानी …
tejaṁ … अग्नि को अग्नि …
vāyaṁ … वायु को वायु …
bhūte … प्राणियों को प्राणी …
deve … देवों को देव …
pajāpatiṁ … प्रजापति को प्रजापति …
brahmaṁ … ब्रह्मा को ब्रह्मा …
ābhassare … आभास्वर देवों को आभास्वर देव …
subhakiṇhe … शुभकृत देवों को शुभकृत देव …
vehapphale … महाफलधारी देवों को महा़फलधारी देव …
abhibhuṁ … अभिभू देवों को अभिभू देव …
ākāsānañcāyatanaṁ … अनंत आकाश के मनोस्थान को अनंत आकाश का मनोस्थान …
viññāṇañcāyatanaṁ … अनंत चेतना के मनोस्थान को अनंत चेतना का मनोस्थान …
ākiñcaññāyatanaṁ … सर्व अभाव के मनोस्थान को सर्व अभाव का मनोस्थान …
nevasaññānāsaññāyatanaṁ … संज्ञा और असंज्ञा के अभाव के मनोस्थान को संज्ञा और असंज्ञा के अभाव का मनोस्थान …
diṭṭhaṁ … देखे हुए को देखा हुआ …
sutaṁ … सुने हुए को सुना हुआ …
mutaṁ … संवेदित को संवेदित …
viññātaṁ … जाने हुए को जाना हुआ …
ekattaṁ … एकता को एकता …
nānattaṁ … विविधता को विविधता …
sabbaṁ … सर्व को सर्व …
nibbānaṁ nibbānato abhijānāti; निर्वाण को निर्वाण …
nibbānaṁ nibbānato abhiññāya nibbānaṁ na maññati, nibbānasmiṁ na maññati, nibbānato na maññati, nibbānaṁ meti na maññati, nibbānaṁ nābhinandati. निर्वाण को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाण के तौर से जानकर स्वयं को निर्वाण नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण में नहीं मानते, स्वयं को निर्वाण से अलग नहीं मानते, निर्वाण मेरा है ऐसा नहीं मानते, निर्वाण में आनंद नहीं लेते।
Taṁ kissa hetu? ऐसा किस लिये?
‘Nandī dukkhassa mūlan’ti—‘आनंद लेने की वृत्ति दु:ख का मूल है’—
iti viditvā ‘bhavā jāti bhūtassa jarāmaraṇan’ti. और ‘अस्तित्वके कारण से जन्म होता है और जो जनम लेता है उसे वृद्धता और मृत्यु का अनुभव होता है’।
Tasmātiha, bhikkhave, ‘tathāgato sabbaso taṇhānaṁ khayā virāgā nirodhā cāgā paṭinissaggā anuttaraṁ sammāsambodhiṁ abhisambuddho’ti vadāmī”ti. इस लिए भिक्षुओ, ‘तृष्णा के संपूर्ण विनाश वैराग्य निरोध त्याग और छुटकारे से तथागत सर्वश्रेष्ठ सम्मसंबुध्धि में जागृत हुए हैं’, कहता हुं।
Tathāgatavasena aṭṭhamanayabhūmiparicchedo niṭṭhito. तथागत की आठवी भूमिपरिच्छेदकी पूर्णता।
Idamavoca bhagavā. भगवंत ने ऐसा कहा:
Na te bhikkhū bhagavato bhāsitaṁ abhinandunti. किंतु वह भिक्षुओं को भगवंत के वचनों में आनंद नहीं आया।
Mūlapariyāyasuttaṁ niṭṭhitaṁ paṭhamaṁ. प्रथम मूलपरियायसूत्र की समाप्ति।