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Majjhima Nikāya 9 मज्झिम निकाय ९

Sammādiṭṭhisutta सम्यक् दृष्टि सूत्र

Evaṁ me sutaṁ—ऐसा मैंने सुना—

ekaṁ samayaṁ bhagavā sāvatthiyaṁ viharati jetavane anāthapiṇḍikassa ārāme. एक समय भगवंत श्रावस्ति के पास अनाथपिंडीका के  जेतवन में विहार कर रहे थे।

Tatra kho āyasmā sāriputto bhikkhū āmantesi: वहां सारिपुत्र ने भिक्षुओं से कहा:

“āvuso bhikkhave”ti. “आदरणीय भिक्षुओं”।

“Āvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa paccassosuṁ. “हाँ आदरणीय”, भिक्षुओं ने सारिपुत्र को जवाब दिया।

Āyasmā sāriputto etadavoca: सारिपुत्र ने भिक्षुओं से कहा:

“‘Sammādiṭṭhi sammādiṭṭhī’ti, āvuso, vuccati. “आदरणीयों, ‘सम्यक् दृष्टि सम्यक् दृष्टि’, कहते हैं।

Kittāvatā nu kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti? किस तरह से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है?”

“Dūratopi kho mayaṁ, āvuso, āgaccheyyāma āyasmato sāriputtassa santike etassa bhāsitassa atthamaññātuṁ. “आदरणीय, हम बहुत दूर से भी आएंगे, आयुष्यमान सारिपुत्र के पास यह उपदेष का अर्थ सुन ने के लिये।

Sādhu vatāyasmantaṁyeva sāriputtaṁ paṭibhātu etassa bhāsitassa attho. आदरणीय सारिपुत्र ही इस का अर्थ स्पष्ट करें तो अच्छा।

Āyasmato sāriputtassa sutvā bhikkhū dhāressantī”ti. जैसे आदरणीय सारिपुत्र कहेंगे वैसे ही भिक्षु याद रखेंगे”।

“Tena hi, āvuso, suṇātha, sādhukaṁ manasi karotha, bhāsissāmī”ti. “तो आदरणीयों, सुनो, और अच्छी तरह से मन में धारण करो, कहता हूँ”।

“Evamāvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa paccassosuṁ. “हाँ आदरणीय”, भिक्षुओं ने सारिपुत्र को जवाब दिया।

Āyasmā sāriputto etadavoca: आयुष्यमान सारिपुत्र ने ऐसा कहा:

“Yato kho, āvuso, ariyasāvako akusalañca pajānāti, akusalamūlañca pajānāti, kusalañca pajānāti, kusalamūlañca pajānāti—“आदरणीयों, जब आर्यश्रावक अकुशल को समझता है, अकुशल के मूल को समझता है, कुशल को समझता है, कुशल के मूल को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, akusalaṁ, katamaṁ akusalamūlaṁ, katamaṁ kusalaṁ, katamaṁ kusalamūlaṁ? और अकुशल क्या है, अकुशल का मूल क्या है, कुशल क्या है, कुशल का मूल क्या है?

Pāṇātipāto kho, āvuso, akusalaṁ, adinnādānaṁ akusalaṁ, kāmesumicchācāro akusalaṁ, musāvādo akusalaṁ, pisuṇā vācā akusalaṁ, pharusā vācā akusalaṁ, samphappalāpo akusalaṁ, abhijjhā akusalaṁ, byāpādo akusalaṁ, micchādiṭṭhi akusalaṁ—प्राणघात अकुशल है, चोरी अकुशल है, कामभोग में दुराचार अकुशल है, झूठ बोलना अकुशल है, बदनामी करना अकुशल है, कठोर वाणी अकुशल है, बकवास करना अकुशल है, लालच, दुर्भावना, और गलत दृष्टि अकुशल है—

idaṁ vuccatāvuso akusalaṁ. इसे आदरणीयों अकुशल कहा जाता है।

Katamañcāvuso, akusalamūlaṁ? अकुशल का मूल क्या है?

Lobho akusalamūlaṁ, doso akusalamūlaṁ, moho akusalamūlaṁ—लोभ अकुशल का मूल है, द्वेष अकुशल का मूल है, मोह अकुशल का मूल है—

idaṁ vuccatāvuso, akusalamūlaṁ. इसे अकुशल का मूल कहा जाता है।

Katamañcāvuso, kusalaṁ? कुशल क्या है?

Pāṇātipātā veramaṇī kusalaṁ, adinnādānā veramaṇī kusalaṁ, kāmesumicchācārā veramaṇī kusalaṁ, musāvādā veramaṇī kusalaṁ, pisuṇāya vācāya veramaṇī kusalaṁ, pharusāya vācāya veramaṇī kusalaṁ, samphappalāpā veramaṇī kusalaṁ, anabhijjhā kusalaṁ, abyāpādo kusalaṁ, sammādiṭṭhi kusalaṁ—प्राणघात न करना कुशल है, चोरी न करना कुशल है, कामभोग में दुराचार न करना कुशल है, झूठ न बोलना कुशल है, बदनामी न करना कुशल है, कठोर वाणी न बोलना कुशल है, बकवास न करना कुशल है, लालच रहितता, सद्भावना, और सही दृष्टि कुशल है—

idaṁ vuccatāvuso, kusalaṁ. इसे कुशल कहा जाता है।

Katamañcāvuso, kusalamūlaṁ? कुशल का मूल क्या है?

Alobho kusalamūlaṁ, adoso kusalamūlaṁ, amoho kusalamūlaṁ—अलोभ, अद्वेष, और अमोह कुशल का मूल है—

idaṁ vuccatāvuso, kusalamūlaṁ. इसे कुशल का मूल कहा जाता है।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ akusalaṁ pajānāti, evaṁ akusalamūlaṁ pajānāti, evaṁ kusalaṁ pajānāti, evaṁ kusalamūlaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, जब आर्यश्रावक अकुशल को समझता है, अकुशल के मूल को समझता है, कुशल को समझता है, कुशल के मूल को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अज्ञान का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa bhāsitaṁ abhinanditvā anumoditvā āyasmantaṁ sāriputtaṁ uttari pañhaṁ apucchuṁ: “बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

“siyā panāvuso, aññopi pariyāyo yathā ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti? “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“Siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako āhārañca pajānāti, āhārasamudayañca pajānāti, āhāranirodhañca pajānāti, āhāranirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यसाधक आहार को समझता है, आहार के उदय को समझता है, आहार के निरोध को समझता है, आहार  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamo panāvuso, āhāro, katamo āhārasamudayo, katamo āhāranirodho, katamā āhāranirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, आहार क्या है, आहार का उदय क्या है, आहार का निरोध क्या है, आहार के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Cattārome, āvuso, āhārā bhūtānaṁ vā sattānaṁ ṭhitiyā, sambhavesīnaṁ vā anuggahāya. आदरणीयों, जीवितों के पालन पोषण के लिये और पैदा होने वालों की सहायता के लिये, चार प्रकार के आहार होते हैं।

Katame cattāro? कौन से चार?

Kabaḷīkāro āhāro oḷāriko vā sukhumo vā, phasso dutiyo, manosañcetanā tatiyā, viññāṇaṁ catutthaṁ. खाने के लिये रूक्ष या बारीक ठोस आहार, संवेदना का संपर्क वह दूसरा, मानसिक संकल्प वह तीसरा, चैतन्य वह चौथा।

Taṇhāsamudayā āhārasamudayo, taṇhānirodhā āhāranirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo āhāranirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—तृष्णा के उदय के साथ आहार का उदय होता है, तृष्णा के निरोध के साथ आहार का निरोध होता है, आहार  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi sammāsaṅkappo sammāvācā sammākammanto, sammāājīvo sammāvāyāmo sammāsati sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ āhāraṁ pajānāti, evaṁ āhārasamudayaṁ pajānāti, evaṁ āhāranirodhaṁ pajānāti, evaṁ āhāranirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक आहार को समझता है, आहार के उदय को समझता है, आहार के निरोध को समझता है, आहार  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa bhāsitaṁ abhinanditvā anumoditvā āyasmantaṁ sāriputtaṁ uttari pañhaṁ apucchuṁ: “बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

“siyā panāvuso, aññopi pariyāyo yathā ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti? “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“Siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako dukkhañca pajānāti, dukkhasamudayañca pajānāti, dukkhanirodhañca pajānāti, dukkhanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यसाधक दुःख को समझता है, दुःख के उदय को समझता है, दुःख के निरोध को समझता है, दुःख  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यसाधक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, dukkhaṁ, katamo dukkhasamudayo, katamo dukkhanirodho, katamā dukkhanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, दुःख क्या है, दुःख का उदय क्या है, दुःख का निरोध क्या है, दुःख  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Jātipi dukkhā, jarāpi dukkhā, maraṇampi dukkhaṁ, sokaparidevadukkhadomanassupāyāsāpi dukkhā, appiyehi sampayogopi dukkho, piyehi vippayogopi dukkho, yampicchaṁ na labhati tampi dukkhaṁ, saṅkhittena pañcupādānakkhandhā dukkhā—जन्म दुःख है, बुढ़ापा दुःख है, मौत दुःख है, शोक, विलाप, पीड़ा, विषाद, निराशा दुःख है, अप्रिय से संयोग दुःख है, प्रिय से जुदाई दुःख है, जो चाहता हो वह न मिलना दुःख है, संक्षिप्त में पांच ग्रहण-आधीन खंड दुःख है—

idaṁ vuccatāvuso, dukkhaṁ. इसे आदरणीयों दुःख कहा जाता है।

Katamo cāvuso, dukkhasamudayo? और आदरणीयों, दुःख का उदय क्या है?

Yāyaṁ taṇhā ponobbhavikā nandīrāgasahagatā tatratatrābhinandinī, seyyathidaṁ—यही वह तृष्णा है, जिसकी वजह से पुनर्जन्म होता है, जो अलग अलग जगह में लालसा के कारण आनंद खोजती है, अर्थात—

kāmataṇhā bhavataṇhā vibhavataṇhā—कामतृष्णा, भवतृष्णा, विभवतृष्णा—

ayaṁ vuccatāvuso, dukkhasamudayo. इसे आदरणीयों, दुःख का उदय कहा जाता है।

Katamo cāvuso, dukkhanirodho? और आदरणीयों, दुःख का निरोध क्या है?

Yo tassāyeva taṇhāya asesavirāganirodho cāgo paṭinissaggo mutti anālayo—यही तृष्णा का धीरे धीरे संपूर्ण तौर पे थोड़ा सा भी अवषेश बचे बिना त्याग, विसर्जन, तृष्णा से मुक्ति, तृष्णा का अनिवास—

ayaṁ vuccatāvuso, dukkhanirodho. इसे आदरणीयों, दुःख का निरोध कहा जाता है।

Katamā cāvuso, dukkhanirodhagāminī paṭipadā? और आदरणीयों, दुःख के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo, seyyathidaṁ—वह यही आर्य अष्टांग मार्ग ही है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi—सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

ayaṁ vuccatāvuso, dukkhanirodhagāminī paṭipadā. इसे आदरणीयों, दुःख के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग कहा जाता है।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ dukkhaṁ pajānāti, evaṁ dukkhasamudayaṁ pajānāti, evaṁ dukkhanirodhaṁ pajānāti, evaṁ dukkhanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक दुःख को समझता है, दुःख के उदय को समझता है, दुःख के निरोध को समझता है, दुःख  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अज्ञान का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa bhāsitaṁ abhinanditvā anumoditvā āyasmantaṁ sāriputtaṁ uttari pañhaṁ apucchuṁ: “बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

“siyā panāvuso, aññopi pariyāyo yathā ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti? “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“Siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako jarāmaraṇañca pajānāti, jarāmaraṇasamudayañca pajānāti, jarāmaraṇanirodhañca pajānāti, jarāmaraṇanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक बुढ़ापे और मौत को समझता है, बुढ़ापे और मौत के उदय को समझता है, बुढ़ापे और मौत के निरोध को समझता है, बुढ़ापे और मौत  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, jarāmaraṇaṁ, katamo jarāmaraṇasamudayo, katamo jarāmaraṇanirodho, katamā jarāmaraṇanirodhagāminī paṭipadā? और आदरणीयों, बुढ़ापा और मौत क्या है, बुढ़ापे और मौत का उदय क्या है, बुढ़ापे और मौत का निरोध क्या है, बुढ़ापे और मौत  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Yā tesaṁ tesaṁ sattānaṁ tamhi tamhi sattanikāye jarā jīraṇatā khaṇḍiccaṁ pāliccaṁ valittacatā āyuno saṁhāni indriyānaṁ paripāko—जो जो स्थान में जीवितों का बुढ़ापा, जीर्णता, दांतो का टूटना, बालों की सफ़ेदी, चमड़ी का मुरझाना, जीव-शक्ति का घटना, इंद्रियों की असफलता—

ayaṁ vuccatāvuso, jarā. इसे आदरणीयों, बुढ़ापा कहा जाता है।

Katamañcāvuso, maraṇaṁ? और आदरणीयों, मौत क्या है?

Yā tesaṁ tesaṁ sattānaṁ tamhā tamhā sattanikāyā cuti cavanatā bhedo antaradhānaṁ maccu maraṇaṁ kālaṅkiriyā khandhānaṁ bhedo, kaḷevarassa nikkhepo, jīvitindriyassupacchedo—जो जो स्थान में जीवितों का निधन, विघटन, अंतर्धान, मृत्यु, काल समाप्ति, खंडों के संयोजन का टूट जाना, देह को शब के तौर पर रख देना, जीव-इंद्रिय का विच्छेद—

idaṁ vuccatāvuso, maraṇaṁ. इसे आदरणीयों, मौत कहा जाता है।

Iti ayañca jarā idañca maraṇaṁ—इस तरह बुढ़ापा और मौत है—

idaṁ vuccatāvuso, jarāmaraṇaṁ. इसे आदरणीयों, बुढ़ापा और मौत कहा जाता है।

Jātisamudayā jarāmaraṇasamudayo, jātinirodhā jarāmaraṇanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo jarāmaraṇanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—जन्म के उदय के साथ बुढ़ापे और मौत का उदय होता है, जन्म के निरोध के साथ बुढ़ापे और मौत का निरोध होता है, बुढ़ापे और मौत  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ jarāmaraṇaṁ pajānāti, evaṁ jarāmaraṇasamudayaṁ pajānāti, evaṁ jarāmaraṇanirodhaṁ pajānāti, evaṁ jarāmaraṇanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक बुढ़ापे और मौत को समझता है,  बुढ़ापे और मौत के उदय को समझता है, बुढ़ापे और मौत के निरोध को समझता है, बुढ़ापे और मौत  के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अज्ञान का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako jātiñca pajānāti, jātisamudayañca pajānāti, jātinirodhañca pajānāti, jātinirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक जन्म को समझता है, जन्म के उदय को समझता है, जन्म  के निरोध को समझता है, जन्म के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamā panāvuso, jāti, katamo jātisamudayo, katamo jātinirodho, katamā jātinirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, जन्म क्या है, जन्म का उदय क्या है, जन्म का निरोध क्या है,  जन्म के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Yā tesaṁ tesaṁ sattānaṁ tamhi tamhi sattanikāye jāti sañjāti okkanti abhinibbatti khandhānaṁ pātubhāvo, āyatanānaṁ paṭilābho—जो जो स्थान में जीवितों का जन्म, उदय, गर्भधारण, आगमन, इंद्रियों की स्थापना—

ayaṁ vuccatāvuso, jāti. इसे आदरणीयों, जन्म कहा जाता है।

Bhavasamudayā jātisamudayo, bhavanirodhā jātinirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo jātinirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—अस्तित्व के उदय के साथ जन्म का उदय होता है, अस्तित्व के निरोध के साथ जन्म का निरोध होता है, जन्म  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ jātiṁ pajānāti, evaṁ jātisamudayaṁ pajānāti, evaṁ jātinirodhaṁ pajānāti, evaṁ jātinirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक जन्म को समझता है, जन्म के उदय को समझता है, जन्म के निरोध को समझता है, जन्म के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako bhavañca pajānāti, bhavasamudayañca pajānāti, bhavanirodhañca pajānāti, bhavanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक अस्तित्व को समझता है, अस्तित्व के उदय को समझता है, अस्तित्व के निरोध को समझता है, अस्तित्व के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamo panāvuso, bhavo, katamo bhavasamudayo, katamo bhavanirodho, katamā bhavanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, अस्तित्व क्या है, अस्तित्व का उदय क्या है, अस्तित्व का निरोध क्या है, अस्तित्व के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Tayome, āvuso, bhavā—आदरणीयों, तीन प्रकार के अस्तित्व होते हैं—

kāmabhavo, rūpabhavo, arūpabhavo. कामलौक में अस्तित्व, रूपलोक में अस्तित्व, अरूपलोक में अस्तित्व।

Upādānasamudayā bhavasamudayo, upādānanirodhā bhavanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo bhavanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—ग्रहण के उदय के साथ अस्तित्व का उदय होता है, ग्रहण के निरोध के  साथ अस्तित्व का निरोध होता है, अस्तित्व के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ bhavaṁ pajānāti, evaṁ bhavasamudayaṁ pajānāti, evaṁ bhavanirodhaṁ pajānāti, evaṁ bhavanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti. इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक अस्तित्व को समझता है, अस्तित्व के उदय को समझता है, अस्तित्व के निरोध को समझता है, अस्तित्व के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

Ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako upādānañca pajānāti, upādānasamudayañca pajānāti, upādānanirodhañca pajānāti, upādānanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक ग्रहण को समझता है, ग्रहण के उदय को समझता है, ग्रहण के निरोध को समझता है, ग्रहण के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, upādānaṁ, katamo upādānasamudayo, katamo upādānanirodho, katamā upādānanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, ग्रहण क्या है, ग्रहण का उदय क्या है, ग्रहण का निरोध क्या है,   ग्रहण के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Cattārimāni, āvuso, upādānāni—आदरणीयों, चार प्रकार का ग्रहण होता है—

kāmupādānaṁ, diṭṭhupādānaṁ, sīlabbatupādānaṁ, attavādupādānaṁ. कामभोग का ग्रहण, मान्यताओं का ग्रहण, रीत-रिवाजों का ग्रहण, आत्मवाद का ग्रहण।

Taṇhāsamudayā upādānasamudayo, taṇhānirodhā upādānanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo upādānanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—तृष्णा के उदय के साथ ग्रहण का उदय होता है, तृष्णा के निरोध के साथ ग्रहण का निरोध होता है, ग्रहण  के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ upādānaṁ pajānāti, evaṁ upādānasamudayaṁ pajānāti, evaṁ upādānanirodhaṁ pajānāti, evaṁ upādānanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक ग्रहण को समझता है, ग्रहण के उदय को समझता है, ग्रहण के निरोध को समझता है, ग्रहण के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako taṇhañca pajānāti, taṇhāsamudayañca pajānāti, taṇhānirodhañca pajānāti, taṇhānirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक तृष्णा को समझता है, तृष्णा के उदय को समझता है, तृष्णा के निरोध को समझता है, तृष्णा के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamā panāvuso, taṇhā, katamo taṇhāsamudayo, katamo taṇhānirodho, katamā taṇhānirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, तृष्णा क्या है, तृष्णा का उदय क्या है, तृष्णा का निरोध क्या है, तृष्णा के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Chayime, āvuso, taṇhākāyā—आदरणीयों, छह प्रकार की तृष्णा होती है—

rūpataṇhā, saddataṇhā, gandhataṇhā, rasataṇhā, phoṭṭhabbataṇhā, dhammataṇhā. रूप तृष्णा, घ्वनि तृष्णा, गंध तृष्णा, स्वाद तृष्णा, स्पर्ष तृष्णा, मानसिक प्रवृत्ति की तृष्णा।

Vedanāsamudayā taṇhāsamudayo, vedanānirodhā taṇhānirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo taṇhānirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—संवेदना के उदय के साथ तृष्णा का उदय होता है, संवेदना के निरोध के साथ तृष्णा का निरोध होता है, तृष्णा के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ taṇhaṁ pajānāti, evaṁ taṇhāsamudayaṁ pajānāti, evaṁ taṇhānirodhaṁ pajānāti, evaṁ taṇhānirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक तृष्णा को समझता है, तृष्णा के उदय को समझता है, तृष्णा के निरोध को समझता है, तृष्णा के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako vedanañca pajānāti, vedanāsamudayañca pajānāti, vedanānirodhañca pajānāti, vedanānirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक संवेदना को समझता है, संवेदना के उदय को समझता है, संवेदना के निरोध को समझता है, संवेदना के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamā panāvuso, vedanā, katamo vedanāsamudayo, katamo vedanānirodho, katamā vedanānirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, संवेदना क्या है, संवेदना का उदय क्या है, संवेदना का निरोध क्या है, संवेदना के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Chayime, āvuso, vedanākāyā—आदरणीयों, छह प्रकार की संवेदना होती है—

cakkhusamphassajā vedanā, sotasamphassajā vedanā, ghānasamphassajā vedanā, jivhāsamphassajā vedanā, kāyasamphassajā vedanā, manosamphassajā vedanā. आंख, कान, नाक, ज़बान, काया, और मन के संपर्क की वजह से उत्पन्न हुइ संवेदना।

Phassasamudayā vedanāsamudayo, phassanirodhā vedanānirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo vedanānirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—संपर्क के उदय के साथ संवेदना का उदय होता है, संपर्क के निरोध के साथ संवेदना का निरोध होता है, संवेदना के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ vedanaṁ pajānāti, evaṁ vedanāsamudayaṁ pajānāti, evaṁ vedanānirodhaṁ pajānāti, evaṁ vedanānirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक संवेदना को समझता है, संवेदना के उदय को समझता है, संवेदना के निरोध को समझता है, संवेदना के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako phassañca pajānāti, phassasamudayañca pajānāti, phassanirodhañca pajānāti, phassanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक संपर्क को समझता है, संपर्क के उदय को समझता है, संपर्क के निरोध को समझता है, संपर्क के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamo panāvuso, phasso, katamo phassasamudayo, katamo phassanirodho, katamā phassanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, संपर्क क्या है, संपर्क का उदय क्या है, संपर्क का निरोध क्या है, संपर्क के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Chayime, āvuso, phassakāyā—आदरणीयों, छह प्रकार के संपर्क होते हैं—

cakkhusamphasso, sotasamphasso, ghānasamphasso, jivhāsamphasso, kāyasamphasso, manosamphasso. आंख, कान, नाक, ज़बान, काया, और मन के द्वार पर उत्पन्न हुआ संपर्क।

Saḷāyatanasamudayā phassasamudayo, saḷāyatananirodhā phassanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo phassanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—छह इंद्रियों के उदय के साथ संपर्क का उदय होता है, छह इंद्रियों के निरोध के साथ संपर्क का निरोध होता है, संपर्क के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ phassaṁ pajānāti, evaṁ phassasamudayaṁ pajānāti, evaṁ phassanirodhaṁ pajānāti, evaṁ phassanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक संपर्क को समझता है, संपर्क के उदय को समझता है, संपर्क के निरोध को समझता है, संपर्क के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako saḷāyatanañca pajānāti, saḷāyatanasamudayañca pajānāti, saḷāyatananirodhañca pajānāti, saḷāyatananirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक छह इंद्रियों को समझता है, छह इंद्रियों के उदय को समझता है, छह इंद्रियों के निरोध को समझता है, छह इंद्रियों के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, saḷāyatanaṁ, katamo saḷāyatanasamudayo, katamo saḷāyatananirodho, katamā saḷāyatananirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, छह इंद्रियां क्या है, छह इंद्रियों का उदय क्या है, छह इंद्रियों का निरोध क्या है, छह इंद्रियों के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Chayimāni, āvuso, āyatanāni—आदरणीयों, छह प्रकार की इंद्रियां होती हैं—

cakkhāyatanaṁ, sotāyatanaṁ, ghānāyatanaṁ, jivhāyatanaṁ, kāyāyatanaṁ, manāyatanaṁ. आंख, कान, नाक, जीभ, काया, और मनोइंद्रिय।

Nāmarūpasamudayā saḷāyatanasamudayo, nāmarūpanirodhā saḷāyatananirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo saḷāyatananirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—नाम-रूप के उदय के साथ छह इंद्रियों का उदय होता है, नाम-रूप के निरोध के साथ छह इंद्रियों का निरोध होता है, छह इंद्रियों के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ saḷāyatanaṁ pajānāti, evaṁ saḷāyatanasamudayaṁ pajānāti, evaṁ saḷāyatananirodhaṁ pajānāti, evaṁ saḷāyatananirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक छह इंद्रियों को समझता है, छह इंद्रियों के उदय को समझता है, छह इंद्रियों के निरोध को समझता है, छह इंद्रियों के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako nāmarūpañca pajānāti, nāmarūpasamudayañca pajānāti, nāmarūpanirodhañca pajānāti, nāmarūpanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक नाम-रूप को समझता है, नाम-रूप के उदय को समझता है, नाम-रूप के निरोध को समझता है, नाम-रूप के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, nāmarūpaṁ, katamo nāmarūpasamudayo, katamo nāmarūpanirodho, katamā nāmarūpanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, नाम-रूप क्या है, नाम-रूप का उदय क्या है, नाम-रूप का निरोध क्या है, नाम-रूप के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Vedanā, saññā, cetanā, phasso, manasikāro—संवेदना, संज्ञान, चैतन्य, संपर्क, मनोलक्ष्य—

idaṁ vuccatāvuso, nāmaṁ; इसे आदरणीयों, नाम कहा जाता है;

cattāri ca mahābhūtāni, catunnañca mahābhūtānaṁ upādāyarūpaṁ—चार महाभूत तत्व और उनसे उत्पन्न हए रूप—

idaṁ vuccatāvuso, rūpaṁ. इसे आदरणीयों, रूप कहा जाता है।

Iti idañca nāmaṁ idañca rūpaṁ—इस तरह नाम है इस तरह रूप है—

idaṁ vuccatāvuso, nāmarūpaṁ. इसे आदरणीयों, नाम-रूप कहा जाता है।

Viññāṇasamudayā nāmarūpasamudayo, viññāṇanirodhā nāmarūpanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo nāmarūpanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—चैतन्य के उदय के साथ नाम-रूप का उदय होता है, चैतन्य के निरोध के साथ नाम-रूप का निरोध होता है, नाम-रूप के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ nāmarūpaṁ pajānāti, evaṁ nāmarūpasamudayaṁ pajānāti, evaṁ nāmarūpanirodhaṁ pajānāti, evaṁ nāmarūpanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक नाम-रूप को समझता है, नाम-रूप के उदय को समझता है, नाम-रूप के निरोध को समझता है, नाम-रूप के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako viññāṇañca pajānāti, viññāṇasamudayañca pajānāti, viññāṇanirodhañca pajānāti, viññāṇanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक ग्रहण को समझता है, ग्रहण के उदय को समझता है, ग्रहण के निरोध को समझता है, ग्रहण के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamaṁ panāvuso, viññāṇaṁ, katamo viññāṇasamudayo, katamo viññāṇanirodho, katamā viññāṇanirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, चैतन्य क्या है, चैतन्य का उदय क्या है, चैतन्य का निरोध क्या है, चैतन्य के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Chayime, āvuso, viññāṇakāyā—आदरणीयों, छह प्रकार के चैतन्य होते हैं—

cakkhuviññāṇaṁ, sotaviññāṇaṁ, ghānaviññāṇaṁ, jivhāviññāṇaṁ, kāyaviññāṇaṁ, manoviññāṇaṁ. चक्षु चैतन्य, कर्ण चैतन्य, नाक चैतन्य, जीभ चैतन्य, काया चैतन्य, मन चैतन्य।

Saṅkhārasamudayā viññāṇasamudayo, saṅkhāranirodhā viññāṇanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo viññāṇanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—संस्कार के उदय के साथ चैतन्य का उदय होता है, संस्कार के निरोध के साथ चैतन्य का निरोध होता है, चैतन्य के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ viññāṇaṁ pajānāti, evaṁ viññāṇasamudayaṁ pajānāti, evaṁ viññāṇanirodhaṁ pajānāti, evaṁ viññāṇanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya …pe… dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक चैतन्य को समझता है, चैतन्य के उदय को समझता है, चैतन्य के निरोध को समझता है, चैतन्य के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हुं’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako saṅkhāre ca pajānāti, saṅkhārasamudayañca pajānāti, saṅkhāranirodhañca pajānāti, saṅkhāranirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक संस्कार को समझता है, संस्कार के उदय को समझता है, संस्कार के निरोध को समझता है, संस्कार के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katame panāvuso, saṅkhārā, katamo saṅkhārasamudayo, katamo saṅkhāranirodho, katamā saṅkhāranirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, संस्कार क्या है, संस्कार का उदय क्या है, संस्कार का निरोध क्या है, संस्कार के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Tayome, āvuso, saṅkhārā—आदरणीयों, तीन प्रकार के संस्कार होते हैं—

kāyasaṅkhāro, vacīsaṅkhāro, cittasaṅkhāro. काया संस्कार, वाणी संस्कार, चित्त संस्कार।

Avijjāsamudayā saṅkhārasamudayo, avijjānirodhā saṅkhāranirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo saṅkhāranirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—अविद्या के उदय के साथ संस्कार का उदय होता है, अविद्या के निरोध के साथ संस्कार का निरोध होता है, संस्कार के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ saṅkhāre pajānāti, evaṁ saṅkhārasamudayaṁ pajānāti, evaṁ saṅkhāranirodhaṁ pajānāti, evaṁ saṅkhāranirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक संस्कार को समझता है, संस्कार के उदय को समझता है, संस्कार के निरोध को समझता है, संस्कार के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho …pe… apucchuṁ—“बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

siyā panāvuso …pe… “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako avijjañca pajānāti, avijjāsamudayañca pajānāti, avijjānirodhañca pajānāti, avijjānirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक अविद्या को समझता है, अविद्या के उदय को समझता है, अविद्या के निरोध को समझता है, अविद्या के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamā panāvuso, avijjā, katamo avijjāsamudayo, katamo avijjānirodho, katamā avijjānirodhagāminī paṭipadā? आदरणीयों, अविद्या क्या है, अविद्या का उदय क्या है, अविद्या का निरोध क्या है, अविद्या के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Yaṁ kho, āvuso, dukkhe aññāṇaṁ, dukkhasamudaye aññāṇaṁ, dukkhanirodhe aññāṇaṁ, dukkhanirodhagāminiyā paṭipadāya aññāṇaṁ—यहां आदरणीयों, दुःख का अज्ञान, दुःख के उदय का अज्ञान, दुःख के निरोध का अज्ञान, दुःख के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग का अज्ञान—

ayaṁ vuccatāvuso, avijjā. इसे आदरणीयों, अविद्या कहा जाता है।

Āsavasamudayā avijjāsamudayo, āsavanirodhā avijjānirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo avijjānirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—अशुद्धियों के उदय के साथ अविद्या का उदय होता है, अशुद्धियों के निरोध के साथ अविद्या का निरोध होता है, अशुद्धियों के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ avijjaṁ pajānāti, evaṁ avijjāsamudayaṁ pajānāti, evaṁ avijjānirodhaṁ pajānāti, evaṁ avijjānirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक अविद्या को समझता है, अविद्या के उदय को समझता है, अविद्या के निरोध को समझता है, अविद्या के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

“Sādhāvuso”ti kho te bhikkhū āyasmato sāriputtassa bhāsitaṁ abhinanditvā anumoditvā āyasmantaṁ sāriputtaṁ uttari pañhaṁ apucchuṁ: “बहुत अच्छा आदरणीय” ऐसा कहके भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से सहमत और खुश हुए और फिर उन्होंने दूसरा सवाल पूछा:

“siyā panāvuso, aññopi pariyāyo yathā ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti? “लेकिन आदरणीय, कोई दूसरी रीति है जिस से आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”?

“Siyā, āvuso. “है, आदरणीयों।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako āsavañca pajānāti, āsavasamudayañca pajānāti, āsavanirodhañca pajānāti, āsavanirodhagāminiṁ paṭipadañca pajānāti—जब आर्यश्रावक अशुद्धियों को समझता है, अशुद्धियों के उदय को समझता है, अशुद्धियों  के निरोध को समझता है, अशुद्धियों के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhammaṁ. तब आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है।

Katamo panāvuso, āsavo, katamo āsavasamudayo, katamo āsavanirodho, katamā āsavanirodhagāminī paṭipadāti? आदरणीयों, अशुद्धियां क्या है, अशुद्धियों का उदय क्या है, अशुद्धियों का निरोध क्या है, अशुद्धियों के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग क्या है?

Tayome, āvuso, āsavā—आदरणीयों, तीन प्रकार की अशुद्धियां होती हैं—

kāmāsavo, bhavāsavo, avijjāsavo. कामभोग की अशुद्धि, अस्तित्व की अशुद्धि, अविद्या की अशुद्धि।

Avijjāsamudayā āsavasamudayo, avijjānirodhā āsavanirodho, ayameva ariyo aṭṭhaṅgiko maggo āsavanirodhagāminī paṭipadā, seyyathidaṁ—अविद्या के उदय के साथ अशुद्धियों का उदय होता है, अविद्या के निरोध के साथ अशुद्धियों का निरोध होता है, अशुद्धियों के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग वह केवल आर्य अष्टांग मार्ग है—

sammādiṭṭhi …pe… sammāsamādhi. सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कार्य, सम्यक् आजीविका, सम्यक् उद्यम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।

Yato kho, āvuso, ariyasāvako evaṁ āsavaṁ pajānāti, evaṁ āsavasamudayaṁ pajānāti, evaṁ āsavanirodhaṁ pajānāti, evaṁ āsavanirodhagāminiṁ paṭipadaṁ pajānāti, so sabbaso rāgānusayaṁ pahāya, paṭighānusayaṁ paṭivinodetvā, ‘asmī’ti diṭṭhimānānusayaṁ samūhanitvā, avijjaṁ pahāya vijjaṁ uppādetvā, diṭṭheva dhamme dukkhassantakaro hoti—इस प्रकार, आदरणीयों, जब आर्यश्रावक अशुद्धियों को समझता है, अशुद्धियों के उदय को समझता है, अशुद्धियों के निरोध को समझता है, अशुद्धियों के निरोध की ओर ले जानेवाले मार्ग को समझता है, तब वह संपूर्ण तौर पर लालसा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, घृणा की आंतरिक मनोवृत्ति का त्याग करता है, ‘मैं हूँ’ यह दृष्टि और अभिमान की आंतरिक मनोवृत्ति का विनाश करता है, और अविद्या का त्याग कर के, ज्ञान का उदय कर के यहीं वर्तमान में दुःख का अंत करता है—

ettāvatāpi kho, āvuso, ariyasāvako sammādiṭṭhi hoti, ujugatāssa diṭṭhi, dhamme aveccappasādena samannāgato, āgato imaṁ saddhamman”ti. इस तरह आदरणीयों, आर्यश्रावक सम्यक् दृष्टिवान कहलाता है, जिसकी दृष्टि सीधी है, जिसे आर्यधर्म में अटल श्रद्धा है, और जो सद्धर्म में आ पहुंचा है”।

Idamavocāyasmā sāriputto. सारिपुत्र ने भिक्षुओं से ऐसा कहा।

Attamanā te bhikkhū āyasmato sāriputtassa bhāsitaṁ abhinandunti. वह भिक्षु सारिपुत्र के वचनों से संतुष्ट और आनंदित हुए।

Sammādiṭṭhisuttaṁ niṭṭhitaṁ navamaṁ. सम्यक् दृष्टि सूत्र की समाप्ति।
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