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Majjhima Nikāya 10 मज्झिम निकाय १०
Satipaṭṭhānasutta स्मृतिप्रस्थान सूत्र
Evaṁ me sutaṁ—ऐसा मैंने सुना—
ekaṁ samayaṁ bhagavā kurūsu viharati kammāsadhammaṁ nāma kurūnaṁ nigamo. एक समय भगवंत कुरुदेश में कम्मासदम्मा गांव में विहार कर रहे थे।
Tatra kho bhagavā bhikkhū āmantesi: वहां भगवंतने भिक्षुओं से कहा:
“bhikkhavo”ti. “भिक्षुओं”।
“Bhadante”ti te bhikkhū bhagavato paccassosuṁ. “भदंत”, भिक्षुओं ने जवाब दिया।
Bhagavā etadavoca: भगवंतने ऐसा कहा:
“Ekāyano ayaṁ, bhikkhave, maggo sattānaṁ visuddhiyā, sokaparidevānaṁ samatikkamāya, dukkhadomanassānaṁ atthaṅgamāya, ñāyassa adhigamāya, nibbānassa sacchikiriyāya, yadidaṁ cattāro satipaṭṭhānā. “एक मार्ग है, भिक्षुओं, जीवितों की विशुद्धि के लिये, शोक विलाप को पार करने के लिये, दुःख और निराशा के अंत के लिये, सच्चे मार्ग की प्राप्ति के लिये, निर्वाण की अनुभूति के लिये, यानी चार स्मृतिप्रस्थान।
Katame cattāro? कौन से चार?
Idha, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati ātāpī sampajāno satimā, vineyya loke abhijjhādomanassaṁ; यहां भिक्षुओं, भिक्षु काया को काया के तौर पर ध्यान से देख कर आतुर, संपज्ञानी, स्मृतिवान, दुनिया के प्रति लोभ और दुर्भावना दूर करके रहता है;
vedanāsu vedanānupassī viharati ātāpī sampajāno satimā, vineyya loke abhijjhādomanassaṁ; संवेदना को संवेदना के तौर पर ध्यान से देख कर आतुर, संपज्ञानी, स्मृतिवान, दुनिया के प्रति लोभ और दुर्भावना दूर करके रहता है;
citte cittānupassī viharati ātāpī sampajāno satimā, vineyya loke abhijjhādomanassaṁ; चित्त को चित्त के तौर पर ध्यान से देख कर आतुर, संपज्ञानी, स्मृतिवान, दुनिया के प्रति लोभ और दुर्भावना दूर करके रहता है;
dhammesu dhammānupassī viharati ātāpī sampajāno satimā, vineyya loke abhijjhādomanassaṁ. घर्मसिद्धांतो को धर्मसिद्धांतो के तौर पर ध्यान से देख कर आतुर, संपज्ञानी, स्मृतिवान, दुनिया के प्रति लोभ और दुर्भावना दूर करके रहता है।
Uddeso niṭṭhito. उपदेश समाप्ति।
1. Kāyānupassanā १. काया का अवलोकन
1.1. Kāyānupassanāānāpānapabba १.१ सांस उच्छ्वास द्वारा काया के अवलोकन का पर्व
Kathañca, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu araññagato vā rukkhamūlagato vā suññāgāragato vā nisīdati, pallaṅkaṁ ābhujitvā, ujuṁ kāyaṁ paṇidhāya, parimukhaṁ satiṁ upaṭṭhapetvā. यहां भिक्षुओं, एक भिक्षु वन में या पेड़ के तलवे पर या खाली कुटिया में पलंथी लगा के, काया को सीधा रख के, स्मृति को सामने रख के बैठता है।
So satova assasati, satova passasati. वह याद रख के सांस लेता है, याद रख के सांस छोड़ता है।
Dīghaṁ vā assasanto ‘dīghaṁ assasāmī’ti pajānāti, dīghaṁ vā passasanto ‘dīghaṁ passasāmī’ti pajānāti, लंबी सांस लेने पर वह जानता है ‘मैं लंबी सांस ले रहा हूँ, लंबी सांस छोड़ने पर वह जानता है ‘मैं लंबी सांस छोड़ रहा हूँ’;
rassaṁ vā assasanto ‘rassaṁ assasāmī’ti pajānāti, rassaṁ vā passasanto ‘rassaṁ passasāmī’ti pajānāti. छोटी सांस लेने पर जानता है ‘मैं छोटी सांस ले रहा हूँ’, छोटी सांस छोड़ने पर जानता है ‘मैं छोटी सांस छोड़ रहा हूँ’;
‘Sabbakāyapaṭisaṁvedī assasissāmī’ti sikkhati, ‘sabbakāyapaṭisaṁvedī passasissāmī’ti sikkhati. ‘पूरी काया का अनुभव करते हुए सांस लेता हूँ’, ऐसा सीखता है, ‘पूरी काया का अनुभव करते हुए सांस छोड़ रहा हूँ’, ऐसा सीखता है;
‘Passambhayaṁ kāyasaṅkhāraṁ assasissāmī’ti sikkhati, ‘passambhayaṁ kāyasaṅkhāraṁ passasissāmī’ti sikkhati. ‘काया की प्रवृत्तियों को शांत करते हुए सांस लेता हूँ’, ऐसा सीखता है, ‘काया की प्रवृत्तियों को शांत करते हुए सांस छोड़ रहा हूँ’, ऐसा सीखता है;
Seyyathāpi, bhikkhave, dakkho bhamakāro vā bhamakārantevāsī vā dīghaṁ vā añchanto ‘dīghaṁ añchāmī’ti pajānāti, rassaṁ vā añchanto ‘rassaṁ añchāmī’ti pajānāti; जैसे एक निपुण सुतार या उसका शिष्य लंबा मोडने पर जानता है के ‘मैं लंबा मोड रहा हूँ’, छोटा मोडने पर जानता है के ‘मैं छोटा मोड रहा हूँ’;
evameva kho, bhikkhave, bhikkhu dīghaṁ vā assasanto ‘dīghaṁ assasāmī’ti pajānāti, dīghaṁ vā passasanto ‘dīghaṁ passasāmī’ti pajānāti, rassaṁ vā assasanto ‘rassaṁ assasāmī’ti pajānāti, rassaṁ vā passasanto ‘rassaṁ passasāmī’ti pajānāti; उसी तरह, भिक्षुओं, भिक्षु लंबी सांस लेने पर जानता है ‘मैं लंबी सांस ले रहा हूँ’, लंबी सांस छोड़ने पर जानता है ‘मैं लंबी सांस छोड़ रहा हूँ’, छोटी सांस लेने पर जानता है ‘मैं छोटी सांस ले रहा हूँ’, छोटी सांस छोड़ने पर जानता है ‘मैं छोटी सांस छोड़ रहा हूँ’;
‘sabbakāyapaṭisaṁvedī assasissāmī’ti sikkhati, ‘sabbakāyapaṭisaṁvedī passasissāmī’ti sikkhati; ‘पूरी काया का अनुभव करते हुए सांस लेता हूँ’, ऐसा सीखता है, ‘पूरी काया का अनुभव करते हुए सांस छोड़ता हूँ’, ऐसा सीखता है;
‘passambhayaṁ kāyasaṅkhāraṁ assasissāmī’ti sikkhati, ‘passambhayaṁ kāyasaṅkhāraṁ passasissāmī’ti sikkhati. ‘काया की प्रवृत्तियों को शांत करते हुए सांस लेता हूँ’, ऐसा सीखता है, ‘काया की प्रवृत्तियों को शांत करते हुए सांस छोड़ता हूँ’, ऐसा सीखता है;
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati, bahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, vayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, samudayavayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati. काया के उदय-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के उदय-धर्म व अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi kāyo’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये आवश्यक ‘काया है’ केवल इतनी ही स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Ānāpānapabbaṁ niṭṭhitaṁ. आनापानस्मृति पर्व की समाप्ति।
1.2. Kāyānupassanāiriyāpathapabba १.२. काया-स्थिति अनुसार काया का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu gacchanto vā ‘gacchāmī’ti pajānāti, ṭhito vā ‘ṭhitomhī’ti pajānāti, nisinno vā ‘nisinnomhī’ti pajānāti, sayāno vā ‘sayānomhī’ti pajānāti. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु चलते समय जानता है ‘मैं चल रहा हूँ’, खडे रहने पर जानता है ‘मैं खडा हूँ’, बैठने पर जानता है ‘मैं बैठा हूँ’, सोते समय जानता है ‘मैं सो रहा हूँ’।
Yathā yathā vā panassa kāyo paṇihito hoti tathā tathā naṁ pajānāti. जैसे जैसे काया की परिस्थिति होती है वैसे वैसे उसकी जान होती है।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati, bahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, vayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, samudayavayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati. काया के उदय-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के उदय-धर्म व अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi kāyo’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘काया है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Iriyāpathapabbaṁ niṭṭhitaṁ. काया-स्थिति पर्व की समाप्ति।
1.3. Kāyānupassanāsampajānapabba १.३. संपूर्ण जानकारी द्वारा काया के अवलोकन का पर्व
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu abhikkante paṭikkante sampajānakārī hoti, ālokite vilokite sampajānakārī hoti, samiñjite pasārite sampajānakārī hoti, saṅghāṭipattacīvaradhāraṇe sampajānakārī hoti, asite pīte khāyite sāyite sampajānakārī hoti, uccārapassāvakamme sampajānakārī hoti, gate ṭhite nisinne sutte jāgarite bhāsite tuṇhībhāve sampajānakārī hoti. और फिर, भिक्षुओं, भिक्षु संपूर्ण जानकारी के साथ आता जाता है, संपूर्ण जानकारी के साथ इधर उधर देखता है, संपूर्ण जानकारी के साथ अंगों को मोड़ता और फैलाता है, संपूर्ण जानकारी के साथ बाहर की संघाटी, कटोरा, और कमीज धारण करता है, संपूर्ण जानकारी के साथ खाता, पीता, चबाता, और आस्वाद लेता है, संपूर्ण जानकारी के साथ शौच व पेशाब करता है, संपूर्ण जानकारी के साथ चलता है, खडा रहता है, बैठता है, सोता है, जागता है, बोलता है, और शांत रहता है।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है;
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Sampajānapabbaṁ niṭṭhitaṁ. संपूर्ण जानकारी पर्व की समाप्ति।
1.4. Kāyānupassanāpaṭikūlamanasikārapabba १.३. काया की प्रतिकूलता पर लक्ष द्वारा काया अवलोकन का पर्व
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu imameva kāyaṁ uddhaṁ pādatalā, adho kesamatthakā, tacapariyantaṁ pūraṁ nānappakārassa asucino paccavekkhati: इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु इसी काया को पैरों के तलवे से उपर की ओर और सर के बाल से नीचे की ओर विविध प्रकार की अशुद्धियों से भरा हुआ देखता है और उसका अनुभव करता है।
‘atthi imasmiṁ kāye kesā lomā nakhā dantā taco maṁsaṁ nhāru aṭṭhi aṭṭhimiñjaṁ vakkaṁ hadayaṁ yakanaṁ kilomakaṁ pihakaṁ papphāsaṁ antaṁ antaguṇaṁ udariyaṁ karīsaṁ pittaṁ semhaṁ pubbo lohitaṁ sedo medo assu vasā kheḷo siṅghāṇikā lasikā muttan’ti. ‘इस काया में सर के बाल, शरीर के बाल, नाखून, दांत, त्वचा, मांस, पेशी, हड्डियां, अस्थि मज्जा, मूत्र पिंड, ह्रृदय, यकृत, उदरपटल, तिल्ली, फेफडे़, अंतड़ी, अन्त्र-पेशी, अपचित आहार, मल, पित्त, कफ, मवाद, खून, पसीना, चरबी, आँसु, तेल, लार, नाक का मल, श्लेष द्रव, मूत्र है।’
Seyyathāpi, bhikkhave, ubhatomukhā putoḷi pūrā nānāvihitassa dhaññassa, seyyathidaṁ—sālīnaṁ vīhīnaṁ muggānaṁ māsānaṁ tilānaṁ taṇḍulānaṁ. Tamenaṁ cakkhumā puriso muñcitvā paccavekkheyya: ‘ime sālī ime vīhī ime muggā ime māsā ime tilā ime taṇḍulā’ti. जिस प्रकार, भिक्षुओं, दोनो बाजुओं में छेद वाली एक थैली हो जो विविध प्रकार के अनाज के दाने से भरी हुइ हो जैसे— उत्तम चावल, गेहूं, मूंग, उड़द, तिल, सादे चावल. और कोई अच्छी नज़र वाला आदमी उसे खोल कर देखे: ‘यह उत्तम चावल है, यह गेहूँ है, यह मूंग है, यह उड़द है, यह तिल है, यह सादे चावल है’।
Evameva kho, bhikkhave, bhikkhu imameva kāyaṁ uddhaṁ pādatalā, adho kesamatthakā, tacapariyantaṁ pūraṁ nānappakārassa asucino paccavekkhati: इसी प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु इसी काया को पैरों के तलवे से उपर की ओर और सर के बाल से नीचे की ओर विविध प्रकार की अशुद्धियों से भरा हुआ देखता है और उसका अनुभव करता है:
‘atthi imasmiṁ kāye kesā lomā …pe… muttan’ti. ‘इस काया में सर के बाल, शरीर के बाल, नाखून, दांत, त्वचा, मांस, पेशी, हड्डियां, अस्थि मज्जा, मूत्रपिंड, ह्रृदय, यकृत, उदरपटल, तिल्ली, फेफड़े, अंतड़ी, अन्त्र-पेशी, अपचित आहार, मल, पित्त, कफ, मवाद, खून, पसीना, चरबी, आँसु, तेल, लार, नाक का मल, श्लेष द्रव, मूत्र है।’
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है।
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Paṭikūlamanasikārapabbaṁ niṭṭhitaṁ. प्रतिकूलता लक्ष पर्व की समाप्ति।
1.5. Kāyānupassanādhātumanasikārapabba १.३. धातुओं के हिसाब से काया के अवलोकन का पर्व
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu imameva kāyaṁ yathāṭhitaṁ yathāpaṇihitaṁ dhātuso paccavekkhati: इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु यही काया की जैसी भी स्थिति हो, जैसी भी दशा हो, उसमें धातुओं के हिसाब से अवलोकन करता है:
‘atthi imasmiṁ kāye pathavīdhātu āpodhātu tejodhātu vāyodhātū’ti. ‘इस काया में पृथ्वी धातु, जल धातु, अग्नि धातु, और वायु धातु है’।
Seyyathāpi, bhikkhave, dakkho goghātako vā goghātakantevāsī vā gāviṁ vadhitvā catumahāpathe bilaso vibhajitvā nisinno assa. जिस तरह से एक निपुण कसाई या कसाई का शिष्य गाय को मार के उसके टुकडों को ले कर चौराहे पर बैठा हो।
Evameva kho, bhikkhave, bhikkhu imameva kāyaṁ yathāṭhitaṁ yathāpaṇihitaṁ dhātuso paccavekkhati: इसी तरह, भिक्षुओं, भिक्षु यही काया की जैसी भी स्थिति हो, जैसी भी दशा हो, उसमें धातुओं के हिसाब से अवलोकन करता है:
‘atthi imasmiṁ kāye pathavīdhātu āpodhātu tejodhātu vāyodhātū’ti. ‘इस काया में पृथ्वी धातु, जल धातु, अग्नि धातु, और वायु धातु है’।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है।
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Dhātumanasikārapabbaṁ niṭṭhitaṁ. धातु पर्व की समाप्ति।
1.6. Kāyānupassanānavasivathikapabba श्मशान गृह में शब के तौर पर काया का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu seyyathāpi passeyya sarīraṁ sivathikāya chaḍḍitaṁ ekāhamataṁ vā dvīhamataṁ vā tīhamataṁ vā uddhumātakaṁ vinīlakaṁ vipubbakajātaṁ. इस के अलावा, भिक्षुओं, मानो के कोई भिक्षु श्मशान में रखे हुए शरीर को देखे जो एक या दो या तीन दिन से मरा हुआ हो और फूला हुआ, नीला, और सड़ा हुआ हो।
So imameva kāyaṁ upasaṁharati: वह उसकी तुलना अपने शरीर से करे:
‘ayampi kho kāyo evaṁdhammo evaṁbhāvī evaṁanatīto’ti. ‘मेरा भी शरीर इसी स्वभाव का है, उसकी यही दशा होगी, उस से पार नही होगा’।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है।
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu seyyathāpi passeyya sarīraṁ sivathikāya chaḍḍitaṁ kākehi vā khajjamānaṁ kulalehi vā khajjamānaṁ gijjhehi vā khajjamānaṁ kaṅkehi vā khajjamānaṁ sunakhehi vā khajjamānaṁ byagghehi vā khajjamānaṁ dīpīhi vā khajjamānaṁ siṅgālehi vā khajjamānaṁ vividhehi vā pāṇakajātehi khajjamānaṁ. इस के अलावा, भिक्षुओं, मानो के कोई भिक्षु श्मशान में रखे हुए शब को देखे जिसे कौए, बाज़, गिद्ध, बगला, कुत्ते, शेर, चीते, या विविध प्रकार के प्राणी खा रहें हों।
So imameva kāyaṁ upasaṁharati: वह उसकी तुलना अपने शरीर से करे:
‘ayampi kho kāyo evaṁdhammo evaṁbhāvī evaṁanatīto’ti. ‘मेरा भी शरीर इसी स्वभाव का है, उसकी यही दशा होगी, उस से पार नही होगा’।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है।
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu seyyathāpi passeyya sarīraṁ sivathikāya chaḍḍitaṁ aṭṭhikasaṅkhalikaṁ samaṁsalohitaṁ nhārusambandhaṁ …pe… इस के अलावा, भिक्षुओं, मानो के कोई भिक्षु श्मशान में रखे हुए मांस और रक्त युक्त पेशी से जुड़ा हुआ अस्थिपंजर देखे …
Aṭṭhikasaṅkhalikaṁ nimaṁsalohitamakkhitaṁ nhārusambandhaṁ …pe… इस के अलावा, भिक्षुओं, मानो के कोई भिक्षु श्मशान में रखे हुए मांस रहित पर रक्त युक्त पेशी से जुड़ा हुआ अस्थिपंजर देखे …
Aṭṭhikasaṅkhalikaṁ apagatamaṁsalohitaṁ nhārusambandhaṁ …pe… इस के अलावा, भिक्षुओं, मानो के कोई भिक्षु श्मशान में रखे हुए मांस और रक्त रहित पर पेशी से जुड़ा हुआ अस्थिपंजर देखे …
Aṭṭhikāni apagatasambandhāni disā vidisā vikkhittāni, aññena hatthaṭṭhikaṁ aññena pādaṭṭhikaṁ aññena gopphakaṭṭhikaṁ aññena jaṅghaṭṭhikaṁ aññena ūruṭṭhikaṁ aññena kaṭiṭṭhikaṁ aññena phāsukaṭṭhikaṁ aññena piṭṭhiṭṭhikaṁ aññena khandhaṭṭhikaṁ aññena gīvaṭṭhikaṁ aññena hanukaṭṭhikaṁ aññena dantaṭṭhikaṁ aññena sīsakaṭāhaṁ. पेशी बिना मात्र हड्डियां, अलग अलग दिशाओं में बिखरी हुई, यहां हाथ की हड्डी, वहां पैर की हड्डी, यहां पिंडली की हड्डी, वहां जांघ की हड्डी, यहां नितंब की हड्डी, वहां कमर की हड्डी, यहां पसलियां, वहां पीठ की हड्डियां, यहां कंधे की हड्डियां, वहां बाहु की हड्डियां, यहां गरदन की हड्डियां, वहां जबड़े की हड्डियां, यहां दांत, वहां खोपड़ी।
So imameva kāyaṁ upasaṁharati: वह उसकी तुलना अपने शरीर से करे:
‘ayampi kho kāyo evaṁdhammo evaṁbhāvī evaṁanatīto’ti. ‘मेरा भी शरीर इसी स्वभाव का है, उसकी यही दशा होगी, उस से पार नही होगा’।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati …pe… इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है।
evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu seyyathāpi passeyya sarīraṁ sivathikāya chaḍḍitaṁ, aṭṭhikāni setāni saṅkhavaṇṇapaṭibhāgāni …pe… शंख जैसी सफेद हड्डियां …
Aṭṭhikāni puñjakitāni terovassikāni …pe… जीर्ण हड्डियां …
Aṭṭhikāni pūtīni cuṇṇakajātāni. सड़ के चूर हुइ हड्डियां …
So imameva kāyaṁ upasaṁharati: वह उसकी तुलना अपने शरीर से करे:
‘ayampi kho kāyo evaṁdhammo evaṁbhāvī evaṁanatīto’ti. ‘मेरा भी शरीर इसी स्वभाव का है, उसकी यही दशा होगी, उस से पार नही होगा’।
Iti ajjhattaṁ vā kāye kāyānupassī viharati, bahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā kāye kāyānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर काया का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, vayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati, samudayavayadhammānupassī vā kāyasmiṁ viharati. काया के उदय-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है, काया के उदय-धर्म व अस्त-धर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi kāyo’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘काया है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu kāye kāyānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु काया का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Navasivathikapabbaṁ niṭṭhitaṁ. संपूर्ण जानकारी पर्व की समाप्ति।
Cuddasakāyānupassanā niṭṭhitā. काया-स्थिति के अवलोकन की समाप्ति।
2. Vedanānupassanā २. संवेदना का अवलोकन
Kathañca, bhikkhave, bhikkhu vedanāsu vedanānupassī viharati? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु संवेदना का संवेदना के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu sukhaṁ vā vedanaṁ vedayamāno ‘sukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु सुखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं सुखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Dukkhaṁ vā vedanaṁ vedayamāno ‘dukkhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Adukkhamasukhaṁ vā vedanaṁ vedayamāno ‘adukkhamasukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Sāmisaṁ vā sukhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘sāmisaṁ sukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. सांसारिक सुखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं सांसारिक सुखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Nirāmisaṁ vā sukhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘nirāmisaṁ sukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. आध्यात्मिक सुखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं आध्यात्मिक सुखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Sāmisaṁ vā dukkhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘sāmisaṁ dukkhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. सांसारिक दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं सांसारिक दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Nirāmisaṁ vā dukkhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘nirāmisaṁ dukkhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. आध्यात्मिक दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं आध्यात्मिक दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Sāmisaṁ vā adukkhamasukhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘sāmisaṁ adukkhamasukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. सांसारिक न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं सांसारिक न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Nirāmisaṁ vā adukkhamasukhaṁ vedanaṁ vedayamāno ‘nirāmisaṁ adukkhamasukhaṁ vedanaṁ vedayāmī’ti pajānāti. आध्यात्मिक न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव करते समय जानता है ‘मैं आध्यात्मिक न सुखद न दुःखद संवेदना का अनुभव कर रहा हूँ’।
Iti ajjhattaṁ vā vedanāsu vedanānupassī viharati, bahiddhā vā vedanāsu vedanānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā vedanāsu vedanānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर संवेदना का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर संवेदना का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर संवेदना का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā vedanāsu viharati, vayadhammānupassī vā vedanāsu viharati, samudayavayadhammānupassī vā vedanāsu viharati. संवेदना के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, संवेदना के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, संवेदना के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi vedanā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘संवेदना है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu vedanāsu vedanānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु संवेदना का काया के तौर पर अवलोकन करता है।
Vedanānupassanā niṭṭhitā. संवेदना अवलोकन पर्व की समाप्ति।
3. Cittānupassanā चित्त अवलोकन
Kathañca, bhikkhave, bhikkhu citte cittānupassī viharati? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु चित्त का चित्त के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu sarāgaṁ vā cittaṁ ‘sarāgaṁ cittan’ti pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु राग समेत चित्त को ‘राग समेत चित्त’ के तौर पर जानता है।
Vītarāgaṁ vā cittaṁ ‘vītarāgaṁ cittan’ti pajānāti. राग रहित चित्त को ‘राग रहित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Sadosaṁ vā cittaṁ ‘sadosaṁ cittan’ti pajānāti. द्वेष समेत चित्त को ‘द्वेष समेत चित्त’ के तौर पर जानता है।
Vītadosaṁ vā cittaṁ ‘vītadosaṁ cittan’ti pajānāti. द्वेष रहित चित्त को ‘द्वेष रहित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Samohaṁ vā cittaṁ ‘samohaṁ cittan’ti pajānāti. मोह समेत चित्त को ‘मोह समेत चित्त’ के तौर पर जानता है।
Vītamohaṁ vā cittaṁ ‘vītamohaṁ cittan’ti pajānāti. मोह रहित चित्त को ‘मोह रहित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Saṅkhittaṁ vā cittaṁ ‘saṅkhittaṁ cittan’ti pajānāti. संकुचित चित्त को ‘संकुचित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Vikkhittaṁ vā cittaṁ ‘vikkhittaṁ cittan’ti pajānāti. विचलित चित्त को ‘विचलित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Mahaggataṁ vā cittaṁ ‘mahaggataṁ cittan’ti pajānāti. विशाल चित्त को ‘विशाल चित्त’ के तौर पर जानता है।
Amahaggataṁ vā cittaṁ ‘amahaggataṁ cittan’ti pajānāti. सीमित चित्त को ‘सीमित चित्त’ के तौर पर जानता है।
Sauttaraṁ vā cittaṁ ‘sauttaraṁ cittan’ti pajānāti. नीच चित्त को ‘नीच चित्त’ के तौर पर जानता है।
Anuttaraṁ vā cittaṁ ‘anuttaraṁ cittan’ti pajānāti. उत्तम चित्त को ‘उत्तम चित्त’ के तौर पर जानता है।
Samāhitaṁ vā cittaṁ ‘samāhitaṁ cittan’ti pajānāti. शांत स्थिर चित्त को ‘ शांत स्थिर चित्त’ के तौर पर जानता है।
Asamāhitaṁ vā cittaṁ ‘asamāhitaṁ cittan’ti pajānāti. अशांत अस्थिर चित्त को ‘अशांत अस्थिर चित्त’ के तौर पर जानता है।
Vimuttaṁ vā cittaṁ ‘vimuttaṁ cittan’ti pajānāti. विमुक्त चित्त को ‘विमुक्त चित्त’ के तौर पर जानता है।
Avimuttaṁ vā cittaṁ ‘avimuttaṁ cittan’ti pajānāti. अविमुक्त चित्त को ‘अविमुक्त चित्त’ के तौर पर जानता है।
Iti ajjhattaṁ vā citte cittānupassī viharati, bahiddhā vā citte cittānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā citte cittānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर चित्त का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर चित्त का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर चित्त का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā cittasmiṁ viharati, vayadhammānupassī vā cittasmiṁ viharati, samudayavayadhammānupassī vā cittasmiṁ viharati. चित्त के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, चित्त के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, चित्त के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi cittan’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘चित्त है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu citte cittānupassī viharati. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु चित्त का चित्त के तौर पर अवलोकन करता है।
Cittānupassanā niṭṭhitā. चित्त अवलोकन पर्व की समाप्ति।
4. Dhammānupassanā धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
4.1. Dhammānupassanānīvaraṇapabba ४.१. अवरोधों के तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
Kathañca, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu nīvaraṇesu. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु पांच अवरोधों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Kathañca pana, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu nīvaraṇesu? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु पांच अवरोधों के अनुसार धर्मसिद्धांतों का धर्मसिद्धांतों के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu santaṁ vā ajjhattaṁ kāmacchandaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ kāmacchando’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ kāmacchandaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ kāmacchando’ti pajānāti; yathā ca anuppannassa kāmacchandassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa kāmacchandassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa kāmacchandassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, एक भिक्षु में जब कामवासना की इच्छा हो तब वह जानता है ‘मुझ में कामवासना की इच्छा है’, जब कामवासना की इच्छा न हो तब वह जानता है ‘मुझ में कामवासना की इच्छा नहीं’, कामवासना की इच्छा किस तरह उत्पन्न होती है यह वह जानता है, उत्पन्न हुइ कामवासना की इच्छा कैसे नष्ट होती है यह वह जानता है, नष्ट हुइ कामवासना की इच्छा फिर से कैसे उत्पन्न नहीं होती यह वह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ byāpādaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ byāpādo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ byāpādaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ byāpādo’ti pajānāti; yathā ca anuppannassa byāpādassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa byāpādassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa byāpādassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, एक भिक्षु में जब द्वेष हो तब वह जानता है ‘मुझ में द्वेष है’, जब द्वेष न हो तब वह जानता है ‘मुझ में द्वेष नहीं’, द्वेष किस तरह उत्पन्न होता है यह वह जानता है, उत्पन्न हुआ द्वेष कैसे नष्ट होता है यह वह जानता है, नष्ट हुआ द्वेष फिर से कैसे उत्पन्न नहीं होता यह वह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ thinamiddhaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ thinamiddhan’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ thinamiddhaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ thinamiddhan’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa thinamiddhassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa thinamiddhassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa thinamiddhassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, एक भिक्षु में जब सुस्ती और आलस हो तब वह जानता है ‘मुझ में सुस्ती और आलस है’, जब सुस्ती और आलस न हो तब वह जानता है ‘मुझ में सुस्ती और आलस नहीं’, सुस्ती और आलस किस तरह उत्पन्न होते हैं यह वह जानता है, उत्पन्न हुए सुस्ती और आलस कैसे नष्ट होते हैं यह वह जानता है, नष्ट हुए सुस्ती और आलस फिर से कैसे उत्पन्न नहीं होते यह वह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ uddhaccakukkuccaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ uddhaccakukkuccan’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ uddhaccakukkuccaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ uddhaccakukkuccan’ti pajānāti; yathā ca anuppannassa uddhaccakukkuccassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa uddhaccakukkuccassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa uddhaccakukkuccassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, एक भिक्षु में जब बेचैनी और चिंता हो तब वह जानता है ‘मुझ में बेचैनी और चिंता है’, जब बेचैनी और चिंता न हो तब वह जानता है ‘मुझ में बेचैनी और चिंता नहीं’, बेचैनी और चिंता किस तरह उत्पन्न होते हैं यह वह जानता है, उत्पन्न हुए बेचैनी और चिंता कैसे नष्ट होते हैं यह वह जानता है, नष्ट हुए बेचैनी और चिंता फिर से कैसे उत्पन्न नहीं होते यह वह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ vicikicchaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ vicikicchā’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ vicikicchaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ vicikicchā’ti pajānāti; yathā ca anuppannāya vicikicchāya uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannāya vicikicchāya pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnāya vicikicchāya āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, एक भिक्षु में जब संदेह हो तब वह जानता है ‘मुझ में संदेह है’, जब संदेह न हो तब वह जानता है ‘मुझ में संदेह नहीं’, संदेह किस तरह उत्पन्न होता है यह वह जानता है, उत्पन्न हुआ संदेह कैसे नष्ट होता है यह वह जानता है, नष्ट हुआ संदेह फिर से कैसे उत्पन्न नहीं होता यह वह जानता है।
Iti ajjhattaṁ vā dhammesu dhammānupassī viharati, bahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā dhammesu viharati, vayadhammānupassī vā dhammesu viharati, samudayavayadhammānupassī vā dhammesu viharati. धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi dhammā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘धर्मसिद्धांत है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu nīvaraṇesu. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु पांच अवरोधों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Nīvaraṇapabbaṁ niṭṭhitaṁ. अवरोध पर्व की समाप्ति।
4.2. Dhammānupassanākhandhapabba ४.२. खंडों के तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu upādānakkhandhesu. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु पांच ग्रहण-आधीन खंडों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Kathañca pana, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu upādānakkhandhesu? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु पांच ग्रहण-आधीन खंडों के अनुसार धर्मसिद्धांतों का धर्मसिद्धांतों के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu: यहां भिक्षुओं, भिक्षु अवलोकन करता है:
‘iti rūpaṁ, iti rūpassa samudayo, iti rūpassa atthaṅgamo; ‘यह रूप है, यह रूप का उदय है, यह रूप का अस्त है;
iti vedanā, iti vedanāya samudayo, iti vedanāya atthaṅgamo; यह संवेदना है, यह संवेदना का उदय है, यह संवेदना का अस्त है;
iti saññā, iti saññāya samudayo, iti saññāya atthaṅgamo; यह संज्ञा है, यह संज्ञा का उदय है, यह संज्ञा का अस्त है;
iti saṅkhārā, iti saṅkhārānaṁ samudayo, iti saṅkhārānaṁ atthaṅgamo; यह संस्कार है, यह संस्कार का उदय है, यह संस्कार का अस्त है;
iti viññāṇaṁ, iti viññāṇassa samudayo, iti viññāṇassa atthaṅgamo’ti; यह चैतन्य है, यह चैतन्य का उदय है, यह चैतन्य का अस्त है’;
iti ajjhattaṁ vā dhammesu dhammānupassī viharati, bahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā dhammesu viharati, vayadhammānupassī vā dhammesu viharati, samudayavayadhammānupassī vā dhammesu viharati. धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi dhammā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘धर्मसिद्धांत है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati pañcasu upādānakkhandhesu. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु पांच ग्रहण-आधीन खंडों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Khandhapabbaṁ niṭṭhitaṁ. खंड पर्व की समाप्ति।
4.3. Dhammānupassanāāyatanapabba ४.३. संवेदनक्षेत्र पर आधारित धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati chasu ajjhattikabāhiresu āyatanesu. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु छह आंतरिक और बाहरी संवेदनक्षेत्रो के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Kathañca pana, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati chasu ajjhattikabāhiresu āyatanesu? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु छह आंतरिक और बाहरी संवेदनक्षेत्रो के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu cakkhuñca pajānāti, rūpe ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु आंख को समझता है, रूप को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Sotañca pajānāti, sadde ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु कान को समझता है, आवाज़ को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Ghānañca pajānāti, gandhe ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु नाक को समझता है, गंध को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Jivhañca pajānāti, rase ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु जीभ को समझता है, स्वाद को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Kāyañca pajānāti, phoṭṭhabbe ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु काया को समझता है, स्पर्श को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Manañca pajānāti, dhamme ca pajānāti, yañca tadubhayaṁ paṭicca uppajjati saṁyojanaṁ tañca pajānāti, yathā ca anuppannassa saṁyojanassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa saṁyojanassa pahānaṁ hoti tañca pajānāti, yathā ca pahīnassa saṁyojanassa āyatiṁ anuppādo hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु मन को समझता है, विचारों को समझता है, उन दोनों के संयोजन से पैदा हुए बंधन को समझता है, अब तक पैदा न हुआ बंधन किस तरह पैदा होता है यह वह समझता है, पैदा हुए बंधन का कैसे त्याग होता है यह वह समझता है, और त्याग किये हुए बंधन फिर से पैदा कैसे नहीं होते यह वह समझता है।
Iti ajjhattaṁ vā dhammesu dhammānupassī viharati, bahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā dhammesu viharati, vayadhammānupassī vā dhammesu viharati, samudayavayadhammānupassī vā dhammesu viharati. धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi dhammā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘धर्मसिद्धांत है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati chasu ajjhattikabāhiresu āyatanesu. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु छह संवेदनक्षेत्रों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Āyatanapabbaṁ niṭṭhitaṁ. संवेदनक्षेत्र पर्व की समाप्ति।
4.4. Dhammānupassanābojjhaṅgapabba ४.४. बोधिअंग के तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati sattasu bojjhaṅgesu. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु सात बोधिअंगों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Kathañca pana, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati sattasu bojjhaṅgesu? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु सात बोधिअंगों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu santaṁ vā ajjhattaṁ satisambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ satisambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ satisambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ satisambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa satisambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa satisambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब स्मृति बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में स्मृति बोधिअंग है’, जब स्मृति बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में स्मृति बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ स्मृति बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए स्मृति बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ dhammavicayasambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ dhammavicayasambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ dhammavicayasambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ dhammavicayasambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa dhammavicayasambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa dhammavicayasambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब धर्मविचारणा का बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में धर्मविचारणा का बोधिअंग है’, जब धर्मविचारणा का बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में धर्मविचारणा का बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ धर्मविचारणा का बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए धर्मविचारणा के बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ vīriyasambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ vīriyasambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ vīriyasambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ vīriyasambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa vīriyasambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa vīriyasambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब ऊर्जा बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में ऊर्जा बोधिअंग है’, जब ऊर्जा बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में ऊर्जा बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ ऊर्जा बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए ऊर्जा बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ pītisambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ pītisambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ pītisambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ pītisambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa pītisambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa pītisambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब हर्ष का बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में हर्ष का बोधिअंग है’, जब हर्ष का बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में हर्ष का बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ हर्ष बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए हर्ष बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ passaddhisambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ passaddhisambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ passaddhisambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ passaddhisambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa passaddhisambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa passaddhisambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब प्रशांति का बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में प्रशांति का बोधिअंग है’, जब प्रशांति का बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में प्रशांति का बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ प्रशांति बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए प्रशांति बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ samādhisambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ samādhisambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ samādhisambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ samādhisambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa samādhisambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa samādhisambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब समाधि का बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में समाधि का बोधिअंग है’, जब समाधि का बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में समाधि का बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ समाधि बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए समाधि बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Santaṁ vā ajjhattaṁ upekkhāsambojjhaṅgaṁ ‘atthi me ajjhattaṁ upekkhāsambojjhaṅgo’ti pajānāti, asantaṁ vā ajjhattaṁ upekkhāsambojjhaṅgaṁ ‘natthi me ajjhattaṁ upekkhāsambojjhaṅgo’ti pajānāti, yathā ca anuppannassa upekkhāsambojjhaṅgassa uppādo hoti tañca pajānāti, yathā ca uppannassa upekkhāsambojjhaṅgassa bhāvanāya pāripūrī hoti tañca pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु में जब समभाव का बोधिअंग होता है तब वह जानता है ‘मुझ में समभाव का बोधिअंग है’, जब समभाव का बोधिअंग नहीं होता तब वह जानता है ‘मुझ में समभाव का बोधिअंग नहीं’, न उत्पन्न हुआ समभाव बोधिअंग किस तरह से उत्पन्न होता है यह जानता है, उत्पन्न हुए समभाव बोधिअंग को विकसित करने से कैसे उसकी परिपूर्णता होती है यह जानता है।
Iti ajjhattaṁ vā dhammesu dhammānupassī viharati, bahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā dhammesu viharati, vayadhammānupassī vā dhammesu viharati, samudayavayadhammānupassī vā dhammesu viharati. धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi dhammā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘धर्मसिद्धांत है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati sattasu bojjhaṅgesu. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु सात बोधिअंगों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Bojjhaṅgapabbaṁ niṭṭhitaṁ. बोधिअंग पर्व की समाप्ति।
4.5. Dhammānupassanāsaccapabba ४.५. आर्यसत्यों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का अवलोकन
Puna caparaṁ, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati catūsu ariyasaccesu. इस के अलावा, भिक्षुओं, भिक्षु चार आर्यसत्यों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Kathañca pana, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati catūsu ariyasaccesu? किस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु चार आर्यसत्यों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है?
Idha, bhikkhave, bhikkhu ‘idaṁ dukkhan’ti yathābhūtaṁ pajānāti, ‘ayaṁ dukkhasamudayo’ti yathābhūtaṁ pajānāti, ‘ayaṁ dukkhanirodho’ti yathābhūtaṁ pajānāti, ‘ayaṁ dukkhanirodhagāminī paṭipadā’ti yathābhūtaṁ pajānāti. यहां, भिक्षुओं, भिक्षु सही तौर पर समझता है ‘यह दुःख है’, सही तौर पर समझता है ‘यह दुःख का उदय है’, सही तौर पर समझता है ‘यह दुःख का निरोध है’, सही तौर पर समझता है ‘यह दुःख के निरोध की ओर ले जानेवाला मार्ग है।
Iti ajjhattaṁ vā dhammesu dhammānupassī viharati, bahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati, ajjhattabahiddhā vā dhammesu dhammānupassī viharati; इस प्रकार आंतरिक तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है, आंतरिक व बाहरी तौर पर धर्मसिद्धांतो का अवलोकन करके रहता है;
samudayadhammānupassī vā dhammesu viharati, vayadhammānupassī vā dhammesu viharati, samudayavayadhammānupassī vā dhammesu viharati. धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है, धर्मसिद्धांतो के उदयधर्म व अस्तधर्म का अवलोकन करके रहता है।
‘Atthi dhammā’ti vā panassa sati paccupaṭṭhitā hoti. Yāvadeva ñāṇamattāya paṭissatimattāya anissito ca viharati, na ca kiñci loke upādiyati. मात्र ज्ञान और स्मृति की स्थापना के लिये जितनी आवश्यक हो उतनी ‘धर्मसिद्धांत है’ ऐसी स्मृति प्रस्थापित करके, दुनिया से अलग, कुछ भी ग्रहण किये बिना रहता है।
Evampi kho, bhikkhave, bhikkhu dhammesu dhammānupassī viharati catūsu ariyasaccesu. इस प्रकार, भिक्षुओं, भिक्षु चार आर्यसत्यों के अनुसार धर्मसिद्धांतो का धर्मसिद्धांतो के तौर पर अवलोकन कर के रहता है।
Saccapabbaṁ niṭṭhitaṁ. आर्यसत्य पर्व की समाप्ति।
Dhammānupassanā niṭṭhitā. धर्मसिद्धांत अवलोकन की समाप्ति।
Yo hi koci, bhikkhave, ime cattāro satipaṭṭhāne evaṁ bhāveyya satta vassāni, tassa dvinnaṁ phalānaṁ aññataraṁ phalaṁ pāṭikaṅkhaṁ भिक्षुओं, जो कोई यह चार स्मृति प्रस्थान सात साल तक विकसित करता है, वह दो में से एक फल की आशा रख सकता है
diṭṭheva dhamme aññā; sati vā upādisese anāgāmitā. इसी जन्म में घर्मज्ञान की प्राप्ति; या अगर कोई बंधन बाकी हो तो अनागामीता।
Tiṭṭhantu, bhikkhave, satta vassāni. सात साल तो जाने दो भिक्षुओं।
Yo hi koci, bhikkhave, ime cattāro satipaṭṭhāne evaṁ bhāveyya cha vassāni …pe… जो कोई यह चार स्मृति प्रस्थान छह साल तक विकसित करता है, वह दो में से एक फल की आशा रख सकता है …
pañca vassāni … पांच साल …
cattāri vassāni … चार साल …
tīṇi vassāni … तीन साल …
dve vassāni … दो साल …
ekaṁ vassaṁ … एक साल …
tiṭṭhatu, bhikkhave, ekaṁ vassaṁ. एक साल तो जाने दो भिक्षुओं।
Yo hi koci, bhikkhave, ime cattāro satipaṭṭhāne evaṁ bhāveyya satta māsāni, tassa dvinnaṁ phalānaṁ aññataraṁ phalaṁ pāṭikaṅkhaṁ जो कोई यह चार स्मृति प्रस्थान सात महीनों तक विकसित करता है, वह दो में से एक फल की आशा रख सकता है …
diṭṭheva dhamme aññā; sati vā upādisese anāgāmitā. इसी जन्म में घर्मज्ञान की प्राप्ति; या अगर कोइ बंधन बाकी हो तो अनागामीता।
Tiṭṭhantu, bhikkhave, satta māsāni. सात महीने तो जाने दो भिक्षुओं।
Yo hi koci, bhikkhave, ime cattāro satipaṭṭhāne evaṁ bhāveyya cha māsāni …pe… जो कोई यह चार स्मृति प्रस्थान छह महीनों तक विकसित करता है, वह दो में से एक फल की आशा रख सकता है …
pañca māsāni … पांच महीनों तक …
cattāri māsāni … चार महीनों तक …
tīṇi māsāni … तीन महीनों तक …
dve māsāni … दो महीनों तक …
ekaṁ māsaṁ … एक महीने तक …
aḍḍhamāsaṁ … आधे महीने तक …
tiṭṭhatu, bhikkhave, aḍḍhamāso. आधा महीना तो जाने दो भिक्षुओं।
Yo hi koci, bhikkhave, ime cattāro satipaṭṭhāne evaṁ bhāveyya sattāhaṁ, tassa dvinnaṁ phalānaṁ aññataraṁ phalaṁ pāṭikaṅkhaṁ जो कोई यह चार स्मृति प्रस्थान सात दिन तक विकसित करता है, वह दो में से एक फल की आशा रख सकता है …
diṭṭheva dhamme aññā sati vā upādisese anāgāmitāti. इसी जन्म में घर्मज्ञान की प्राप्ति; या अगर कोई बंधन बाकी हो तो अनागामीता।
‘Ekāyano ayaṁ, bhikkhave, maggo sattānaṁ visuddhiyā sokaparidevānaṁ samatikkamāya dukkhadomanassānaṁ atthaṅgamāya ñāyassa adhigamāya nibbānassa sacchikiriyāya yadidaṁ cattāro satipaṭṭhānā’ti. एक मार्ग है, भिक्षुओं, जीवितों की विशुद्धि के लिये, शोक विलाप को पार करने के लिये, दुःख और निराशा के अंत के लिये, सच्चे मार्ग की प्राप्ति के लिये, निर्वाण की अनुभूति के लिये, यानी चार स्मृतिप्रस्थान।
Iti yaṁ taṁ vuttaṁ, idametaṁ paṭicca vuttan”ti. ऐसा मैंने कहा, और इस लिये कहा”।
Idamavoca bhagavā. भगवंत ने ऐसा कहा।
Attamanā te bhikkhū bhagavato bhāsitaṁ abhinandunti. वह भिक्षु भगवंत के वचनों से संतुष्ट और आनंदित हुए।
Satipaṭṭhānasuttaṁ niṭṭhitaṁ dasamaṁ. स्मृति प्रस्थान सूत्र की समाप्ति।
Mūlapariyāyavaggo niṭṭhito paṭhamo. प्रथम मूल पर्याय वाग्य की समाप्ति।
Tassuddānaṁ संक्षिप्त आदान
Mūlasusaṁvaradhammadāyādā, मूल उपदेश
Bheravānaṅgaṇākaṅkheyyavatthaṁ;
Sallekhasammādiṭṭhisatipaṭṭhaṁ,
Vaggavaro asamo susamatto.